मंत्री लालसिंह की बढ़ी मुश्किल, कोर्ट ने उपस्थिति पर नहीं लगाई रोकUpdated: Wed, 13 Sep 2017 07:37 PM (IST)

कोर्ट ने श्री आर्य को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

ग्वालियर। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें भिंड के विशेष कोर्ट से गोहद विधायक माखन जाटव हत्याकांड में जारी 25 हजार के जमानती वारंट पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने श्री आर्य को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इस आवेदन के खारिज होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। 14 सितंबर को उन्हें विशेष कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भिंड के विशेष कोर्ट ने 24 अगस्त को गोहद विधायक माखन जाटव हत्याकांड मामले श्री आर्य को धारा 319 के तहत सह आरोपी बनाया था। उन्हें 25 हजार का जमानती वारंट जारी कर 14 सितंबर को तलब किया है। इस आदेश पर उन्होंने क्रिमिनल रिवीजन दायर कर चुनौती दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सीबीआई ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है। विशेष कोर्ट इंदौर में सीबीआई ने चालान पेश किया है।

भिंड की विशेष कोर्ट को उन्हें सह आरोपी बनाने का अधिकार नहीं है। भिंड कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया है। इसलिए धारा 319 की कार्रवाई को निरस्त किया जाए। साथ ही अंतरिम राहत के लिए एक आवेदन पेश किया। विशेष कोर्ट ने उन्हें 25 हजार के जमानती वारंट पर तलब किया है।

उन्हें 14 सितंबर को कोर्ट में उपस्थित होना है। इसलिए उपस्थिति पर रोक लगाई जाए या फिर 14 सितंबर को विशेष कोर्ट में उपस्थित होते हैं तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाए और जमानत पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने इस मांग को खारिज दिया। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विशाल मिश्रा व शासकीय अधिवक्ता बीके शर्मा उपस्थित हुए। उन्होंने शासन से दिशा निर्देश लेने के लिए 7 दिन का वक्त लिया। हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिवीजन को गुण दोष पर निराकरण करने के लिए 25 सितंबर की तारीक निर्धारित की है।

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