खुद को केदारनाथ हादसे में लापता घोषित करने वाला हत्यारा पकड़ायाUpdated: Wed, 12 Apr 2017 03:55 AM (IST)

महिला आरक्षक की हत्या के मामले में कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस का बाबू फरार हो गया।

ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। महिला आरक्षक की हत्या के मामले में कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस का बाबू फरार हो गया। 11 साल तक पुलिस कोर्ट का वारंट लेकर इसे तलाशती रही। इसी बीच केदारनाथ हादसे में बाबू ने बेटों की मदद से खुद को लापता बताकर पुलिस और कोर्ट को गुमराह किया, लेकिन 70 हजार के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में बाबू के जीवित होने का राज खुल गया। क्राइम ब्रांच ने बाबू को दोनों बेटों सहित पकड़ लिया है। पुलिस पता लगा रही है कि बाबू के परिजनों ने केदारनाथ हादसे में कोई सरकारी मदद तो नहीं ली है।

एएसपी क्राइम आलोक सिंह ने बताया कि भगवान दास कुशवाह पुलिस में बाबू था। वर्ष 2000 में भगवान दास पर महिला आरक्षक रेखा की हत्या का मामला मुरार थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। वर्ष 2002 में अपर सत्र न्यायालय दशम ने रेखा की हत्या के लिए भगवान दास को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनााई और 30 हजार का अर्थदंड लगाया। सजायाफ्ता ने कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और जमानत पर रिहा होने के बाद गायब हो गया। कोर्ट का वारंट लेकर पुलिस 11 साल से उसे तलाश रही थी।

2013 में केदारनाथ हादसे में लापता बताया

सजायाफ्ता भगवान दास ने बेटे दशरथ व नरेंद्र की मदद से जून 2013 में केदारनाथ हादसे में कथित रूप से लापता होने का षड्यंत्र रचा। बेटों ने ने मोहल्ले वालों के हस्ताक्षर कराकर कोर्ट में एक पंचनामा पेश किया कि भगवान दास केदारनाथ के दर्शन के लिए गए थे, तभी से वे लापता हैं। क्योंकि केदारनाथ हादसे में सैकड़ों लोगों के शव नहीं मिले थे।

इसी का आरोपियों ने फायदा उठाने के लिए ये साजिश रची गई। ये लोग कोर्ट व पुलिस को गुमराह करने में सफल भी रहे। क्योंकि तभी से भगवान दास को तलाशने के लिए जाने वाली पुलिस को परिजन यही पंचनामा दिखाते है। उसके बाद से कोर्ट से भी उसके वारंट निकलना बंद हो गए। इससे वह सुकून से परिजनों के संपर्क में था।

70 हजार के विवाद में खुला जिंदा होने का राज

पुलिस ने बताया कि भगवान दास ने बृजमोहन पुत्र खुशालीराम कुशवाह से 70 हजार रुपए उधार ले रखे थे। कुछ दिन पूर्व जौरासी के मंदिर के पास भगवान दास उसे नजर आ गया। जिसके बाद बृजमोहन ने उसके परिजनों से उधारी के 70 हजार रुपए मांगने शुरू कर दिए। उधारी मांगने पर भगवान दास व उसके बेटों ने अन्य लोगों की मदद से बृजमोहन की मारपीट कर दी।

मारपीट का मामला सिरौल थाने में दर्ज है। बृजमोहन को निपटाने के लिए बेटे दशरथ ने एक व्यक्ति से कट्टे व राउंड लिए। बृजमोहन ने भगवान दास के जीवित होने का राज क्राइम ब्रांच को बता दिया। क्राइम ब्रांच ने भगवान दास व उसके पुत्र नरेंद्र व दशरथ को गिरफ्तार कर उसके जीवित होने का राज खोल दिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 कट्टे व कारतूस भी बरामद किए हैं।

आर्थिक सहायता के संबंध में पुलिस पता लगा रही है

एएसपी ने बताया कि नरेंद्र व दशरथ ने केदारनाथ हादसे में पिता को लापता बताकर उत्तराखंड सरकार से कोई आर्थिक मदद तो हासिल नहीं की है। इसका भी पता कलेक्टर के माध्यम से लगाया जा रहा है। आरोपी आर्थिक मदद लेने की बात से इंकार कर रहे हैं। भगवान दास कुशवाह के जीवित होने की सूचना पुलिस ने कोर्ट को भी दे दी है।

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