खालिस्तानी आतंकियों को हथियार देने वालों की तलाश में एटीएसUpdated: Sat, 12 Aug 2017 03:48 AM (IST)

इनपुट के आधार पर एटीएस की टीम उन लोगों की तलाश कर रही है कि जिनसे इन लोगों ने हथियार हासिल किए थे।

ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स से जुड़े 3 लोगों को पकड़कर ले गईं पंजाब एटीएस द्वारा 16 अगस्त तक रिमांड पर लेने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। पंजाब पुलिस से मिल रहे इनपुट के आधार पर एटीएस की टीम उन लोगों की तलाश कर रही है कि जिनसे इन लोगों ने हथियार हासिल किए थे। सूत्रों का कहना है कि 2 लोग नाम सामने आए हैं। जिनकी तलाश की जा रही है। एक संदेही हिरासत में बताया जा रहा है।

बुधवार को पंजाब पुलिस ने प्रदेश की एटीएस व थाटीपुर थाना पुलिस की मदद से बलकार सिंह हाल निवासी चीनौर, बलविंदर सिंह मूल निवासी पंजाब, हाल निवासी डबरा कांशीपुर व सतेंद्र रावत उर्फ छोटू रावत निवासी डबरा हाल थाटीपुर को पकड़कर पंजाब ले गई। बलकार सिंह व बलविंदर सिंह केएलएफ से जुड़े हैं। इन लोगों का काम से अंचल से हथियार जुटाकर पंजाब भेजना था। पंजाब बॉर्डर पर हथियारों व कारतूसों की बड़ी खेप पकड़े जाने पर इन दोनों आरोपियों के नाम सामने आए थे।

तीनों से की जा रही है पूछताछ- दोनों आतंकियों व उनके मददगार सतेंद्र रावत को 16 अगस्त तक रिमांड पर लेने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। पंजाब पुलिस इन लोगों से ये उगलवाने का प्रयास कर रही है कि अब तक ये लोग कितने और कौन से हथियार व कारतूस आतंकी गतिविधियों के लिए अपने साथियों तक भेज चुके हैं। और ये हथियार किन स्थानीय लोगों से हथियार हासिल करते थे। हालांकि पूछताछ में मिल रहे इनपुट को गोपनीय रखा जा रहा है। और एटीएस की एक टीम पंजाब से मिल रहे इनपुट के आधार पर कार्रवाई कर रही है। लेकिन इसकी जानकारी फिलहाल स्थानीय पुलिस अधिकारियों को नहीं दी जा रही है।

सूत्रों से पता चला है कि 2 और नाम सामने आए हैं। जिनके माध्यम से बलकार व बलविंदर ने हथियार व कारतूस हासिल किए हैं। सतेंद्र से जुड़े 2 सिपाहियों से भी पूछताछ कर इनकी गतिविधियों के संबंध में पूछताछ की जाएगी। हालांकि इस संबंध में स्थानीय पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सीएसपी रत्नेश तोमर का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी उनके पास नहीं है। सू्‌त्रों के अनुसार एक संदेही को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। इसके साथ ही तीनों आरोपियों से मिले इनपुट के आधार पर पंजाब पुलिस एक-दो दिन में धरपकड़ करने के लिए आ सकती है।

स्थानीय पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच पाती ये जानकारी

जीवाजी यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने के दौरान सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न कर गायब हुए कश्मीरी युवकों का मामला हो। या फिर डिब्बे के माध्यम से किए जाने वाले इंटरनेशनल कॉल का मामला हो। लेकिन गतिविधियों की जानकारी जिला पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच पाती है। एटीएस व अन्य प्रांतों की पुलिस द्वारा कार्रवाई करने के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारियों को पता चलता है कि जिले में ऐसा भी हो रहा था। केएलएफ से जुड़े 2 आंतकियों के पकड़े जाने के बाद भई स्थानीय पुलिस अधिकारियों का मुखबिर तंत्र पर सवाल उठना स्वाभिवक है।

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