स्मृति वन में जैविक खाद बनाने वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की शुरूUpdated: Fri, 13 Oct 2017 04:11 AM (IST)

-जीवाजी यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त वाइस चांसलर ने किया शुभारंभ गुना। नवदुनिया प्रतिनिधि स्मृति वन में गुरुवार को कचरे से जैविक खाद बनाने की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट शुरू की गई। इस अवसर पर जीवाजी यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त वाइस चांसलर व वर्मी कम्पोस्ट विशेषज्ञ डॉ. ओपी अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने 'कचरे को किस तरह से अतिरिक्त अर्थोपार्जन क

-जीवाजी यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त वाइस चांसलर ने किया शुभारंभ

गुना। नवदुनिया प्रतिनिधि

स्मृति वन में गुरुवार को कचरे से जैविक खाद बनाने की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट शुरू की गई। इस अवसर पर जीवाजी यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त वाइस चांसलर व वर्मी कम्पोस्ट विशेषज्ञ डॉ. ओपी अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने 'कचरे को किस तरह से अतिरिक्त अर्थोपार्जन के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है' विषय पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि जहां मनुष्य रहेगा वहां कचरा तो होगा ही, लेकिन सभ्य समाज वही है जो कचरे का निपटान बेहतर तरीके से कर सकता है। स्मृति वन में आज यह यूनिट गुना के लोगों की जागरुकता की प्रतीक है। इस विधि से हमारे बेरोजगार युवा अपने जेब खर्च का प्रबंध भी कर सकते हैं। अपनी कॉलोनी या घरों के कचरे को एकत्रित कर हम उसे जैविक खाद में बदल सकते हैं। इससे कचरे का निपटान तो होगा ही, जैविक खाद के उपयोग से फसल भी रासायनिक खादों से मुक्त होगी, वहीं आय का भी अतिरिक्त जरिया मिल सकता है। इस अवसर पर प्रो. अशोक दहीभाते, विनोद नायक, राकेश मिश्रा, विजय उप्पल, जयराम विसें, रोहित भार्गव, आफताब खान, बाबू सर, ब्रजेश दुबे, ब्रजेश लाहोटी, हरिनारायण शर्मा, कुवरपाल सोमवंसी, रघुवीर यादव, जगराम सिंह, पुष्पराग व गुना पब्लिक स्कूल के छात्र मौजूद रहे। बच्चों ने इस आयोजन के दौरान पौधरोपण किया।

ऐसे बनाएं जैविक खाद

डॉ. पुष्पराग शर्मा ने बताया कि जैविक खाद बनाने के लिए एक हौदी में घर के कचरे को एकत्रित करें और इसमें कुछ केंचुए डाल दें। यह केंचुए इस कचरे को खाकर जैविक खाद बना देंगे। यह खाद केवल 15 दिन में बन जाएगी और इस खाद का उपयोग घर में पौधों, खेती या बेचने के लिए भी किया जा सकता है। इससे स्वच्छता तो बढ़ेगी ही, रसायनिक खाद से मुक्ति मिलेगी। हां यह जरूर है कि कचरे में प्लास्टिक, पॉलीथीन, केमिकल आदि शामिल नहीं होना चाहिए। नहीं तो केंचुए मर जाएंगे। कचरे के रूप में कागज, गोबर, खाने की वस्तुएं, फल, लकड़ी, मिट्टी आदि हो सकती हैं। यह खाद करीब 10 रुपए किलो में बिकती है। स्मृति वन में लगभग पांच हजार रुपए कीमत की खाद केंचुओं की मदद से तैयार कर उपयोग में लाई जाएगी।

नोट-फोटो केप्शन

1210जीयूएनए-01-गुना। जैविक खाद वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का शुभारंभ करते हुए अतिथि।

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