इंदौर-देवास रेलवे ट्रेक का सुधार कार्य, बदलेंगे 27 किमी ट्रेक के स्लीपरUpdated: Mon, 25 Sep 2017 03:59 AM (IST)

रेलवे देवास-इंदौर के बीच वर्तमान ट्रेक को दुरुस्त करने जा रहा है।

देवास। इंदौर-देवास-उज्जैन ट्रेक दोहरीकरण की कवायद के बीच रेलवे देवास-इंदौर के बीच वर्तमान ट्रेक को दुरुस्त करने जा रहा है। इसके तहत सबसे पहले देवास से मांगलिया के बीच रेलवे ट्रेक के बीच लगे स्लीपर बदले जाएंगे।

बताया जाता है कि इसका काम अगले महीने शुरू होगा। इस दौरान 27 किमी ट्रेक के करीब 45 हजार स्लीपर बदले जाएंगे। काम पूरा होने में करीब एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।

जानकारी के अनुसार काम इस साल के रेल बजट में जारी पिंक बुक में शामिल किया गया था। इसमें इंदौर से देवास व मक्सी तक लाइन सुधार का काम प्रस्तावित था। देवास से मांगलिया तक स्लीपर बदलने का काम इसी के तहत किया जाएगा। स्लीपर बदलने का काम अगले महीने शुरू होगा।

रेलवे के इंजीनियरिंग सेक्शन के अनुसार स्लीपर बदलने के बाद रेल (पटरी) बदलने का काम किया जाएगा। रेलवे के मुताबिक अधिकांश समय काम रात आधी रात से अलसुबह तक होगा, क्योंकि रात के समय इस रूट पर ट्रेनें नहीं चलती है। हालांकि इसके लिए ब्लॉक भी लेना पड़ेगा।

44820 स्लीपर बदलेंगे

रेलवे सेक्शन इंजीनियर महेश मीणा के अनुसार स्लीपर बदलने का काम देवास से मांगलिया के बीच 27 किमी रेल लाइन पर किया जाएगा। बताया जाता है कि एक किमी के ट्रेक में 1660 स्लीपर लगते हैं। इस हिसाब से देवास से मांगलिया के बीच करीब 44820 स्लीपर बदले जाएंगे।

पुराने लगाए गए थे, इसलिए बदल रहे

जानकारी के अनुसार वैसे को स्लीपर की उम्र करीब 50 साल होती है, लेकिन देवास-इंदौर के बीच डली लाइन में रेल और स्लीपर पुराने लगाए गए थे। बताया जाता है कि देवास-इंदौर के बीच ट्रेक 2001 के आसपास नागदा व रतलाम से निकाल कर लगाया गया था। इसीलिए स्लीपर और रेल बदलने की जरूरत पड़ रही है। क्योंकि पुराने ट्रेक के कारण ट्रेनों की स्पीड पर फर्क पड़ रहा है।

तो बढ़ सकती है स्पीड

देवास-इंदौर के बीच अभी ट्रेनों की स्पीड अभी लगभग 65 से 70 किमी प्रति घंटा रहती है। हालत यह है कि देवास से इंदौर के बीच ट्रेन को यदि 100 की स्पीड पर चलाया जाए तो वह हिलने लग जाती है। इसकी वजह ट्रेक का पुराना होना है। ट्रेक का नवीनीकरण हो जाता है तो पूरे हिस्से में ट्रेन 125 किमी प्रति घंटा की गति से चलने लगेगी। इसलिए यहां फॉर्मेशन (काली मिट्टी का बेस), स्लीपर और रेल तीनों ही बदलना प्रस्तावित है।

फैक्ट फाइल

- 1660 स्लीपर होते हैं एक किमी में

- 44860 स्लीपर बदले जाएंगे

- 27 किमी ट्रेक के बदले जाएंगे स्लीपर

- 1 से डेढ़ साल लगेगा काम पूरा होने में

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