शावक के साथ चहलकदमी करते हुए गांव तक पहुंच गई बाघिन, वन विभाग को जानकारी नहींUpdated: Tue, 05 Dec 2017 04:08 AM (IST)

एक बाघिन अपने शावक के साथ जंगल से निकलकर रविवार रात राजधानी से सटे ईंटखेड़ी गांव तक पहुंच गई।

भोपाल। एक बाघिन अपने शावक के साथ जंगल से निकलकर रविवार रात राजधानी से सटे ईंटखेड़ी गांव तक पहुंच गई। इनकी मौजूदगी पर आवारा कुत्ते भौंकने लगे। यह शोरगुल सुन एक ग्रामीण ने मौके पर जाकर देखा तो बाघिन और शावक गांव के शांतिधाम के पास नजर आए। वह उल्टे पांव बस्ती पहुंचा और लोगों को सूचना दी।

लोग वहां पहुंचे तब तक बाघिन वहां से जा चुकी थी। सोमवार सुबह वन विभाग का अमला गांव पहुंचा और आसपास के जंगल में सर्चिंग की, लेकिन कुछ नहीं मिला। इधर, ग्रामीण का दावा है कि 15 दिन पहले भी बाघिन शावक के साथ दिखी थी। सर्चिंग क बाद भोपाल कंजरवेटर फॉरेस्ट (सीएफ) डॉ. एसपी तिवारी ने कहा कि बाघिन व शावक नहीं मिले हैं।

ईंटखेड़ी गांव बैरसिया रोड पर है। यह वन विभाग की समरधा रेंज से लगा है। गांव के हाकम सिंह ने बताया कि रात के करीब 11 बजे उसे शांतिधाम के पास कुत्तों का शोरगुल सुनाई दिया। वह टॉर्च के उजाले में शांतिधाम की तरफ बढ़ा तो सामने बाघिन और उसके साथ एक शावक दिखा। हाकम सिंह ने बताया कि यह देख उसके हाथ-पांव कांपने लगे। उसने तुरंत टॉर्च बंद की और किसी तरह बस्ती में पहुंचा।

बता दें कि भोपाल के जंगल में आधा दर्जन बाघों का मूवमेंट हैं इनमें बाघिन टी-213, टी- 221 और बाघिन टी-123 शामिल हैं। इनमें से बाघिन टी-213 और टी- 221 पूर्व में शावकों को जन्म भी दे चुकी हैं। संभावना जताई जा रही है इन्हीं में से कोई एक बाघिन ईंटखेड़ी पहुंची होगी। हालांकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।

तीन साल पहले इस रूट से शहर की तरफ आ चुका है बाघ

समरधा रेंज से लगे ईंटखेड़ी और नबी बाग दोनों आपस में सटे हुए हैं। तीन साल पहले इसी रूट से होकर एक बाघ शहर की तरफ घुस आया था। तब वन विभाग को बाघ को पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। वन्यप्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ इस रूट से होकर शहर की तरफ दोबारा आ सकते हैं। इसलिए वन विभाग को यहां नजर रखनी होगी। यदि बाघ यहां से शहर में घुसा तो आबादी को बहुत नुकसान हो सकता है।

सर्चिंग टीम को नहीं मिले पगमार्क

भोपाल कंजरवेटर फॉरेस्ट डॉ. एसपी तिवारी ने बताया सूचना पर टीम भेजकर गांव से सटे जंगल में सर्चिंग की गई है। लेकिन बाघिन और उसके शावक नहीं मिले। उनके पगमार्क भी नहीं मिले हैं। ग्रामीणों के बताए अनुसार गांव से सटे जंगल के आसपास बाघिन और शावक पर नजर रखने के लिए एक टीम लगा दी है। ई-सर्विलांस टॉवर के माध्यम से भी नजर रखी जा रही है।

शावक की जान को खतरा

यदि बाघिन के साथ शावक है और वह गांव तक आ रही है तो उन दोनों की जान को शिकारियों से खतरा हो सकता है। वन विभाग को स्पेशल गश्ती टीम लगाकर दोनों की सुरक्षा करनी चाहिए। यदि वे आबादी के आसपास हैं तो उन्हें जंगल में खदेड़ना होगा - आरके दीक्षित, वन्यप्राणी विशेषज्ञ, भोपाल

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