सागर महापौर दरे को मिला अभयदान, राजनैतिक वनवास खत्मUpdated: Tue, 12 Sep 2017 11:06 PM (IST)

महापौर अभय दरे को सरकार-शासन से अभयदान मिल गया है।

सागर। महापौर अभय दरे को सरकार-शासन से अभयदान मिल गया है। उनके राजनैतिक कॅरियर पर बना असमंजस फिलहाल समाप्त हो गया है। जेसीबी भुगतान मामले में सोशल मीडिया में कमीशन ऑडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर जांच बैठाई गई थी। 3 मार्च को शासन ने दरे के बतौर महापौर वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिए थे। करीब सवा सात महीने बाद उनकी निगम में बेदाग वापसी हो रही है। महापौर के पावर बहाल होने की सूचना के बाद निगम और राजनैतिक हलको में बध्ााईयों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने मंगलवार देर शाम आदेश जारी कर महापौर अभय दरे के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल कर दिए हैं। देर शाम को पीएस का आदेश नगर निगम आयुक्त कार्यालय पहुंच गया। महापौर दरे की बहाली की सूचना मिलते ही उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला प्रारंभ हो गया।

महापौर दरे की बहाली की पुष्टि देर शाम विधायक शैलेंद्र जैन और नगर निगम आयुक्त अनुराग वर्मा ने की है। महापौर दरे पिछले तीन दिन से सागर से बाहर हैं। रविवार को वे इंदौर में थे, वहीं मंगलवार को भोपाल में मौजूद थे। उम्मीद की जा रही है कि वे बुधवार को नगर निगम पहुंचकर पदभार संभाल लेंगे।

21 फरवरी को कथित ऑडियो वायरल हुआ था

महापौर दरे और निगम के कंप्यूटर ठेकेदार संतोष प्रजापति के बीच जेसीबी मशीन के भुगतान को लेकर कथित रूप से कमीशन की बातचीत को लेकर ऑडियो वायरल हुआ था। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 फरवरी को नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त को जांच के आदेश दिए थे। महापौर हाईकोर्ट से एक केस 1 मार्च 2017 को निगम पहुंचे थे।

इधर दो मार्च को भोपाल में आयुक्त विवेक अग्रवाल ने महापौर व ठेकेदार के बयान लिए थे। इसके ठीक अगले दिन 3 मार्च को आनन-फानन में विभाग के आयुक्त विवेक अग्रवाल सह सचिव ने उन्हें प्राथमिक रूप से कदाचरण का दोषी पाते हुए वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिए थे। सरकार ने मामले में और सख्त कदम उठाते हुए प्रकरण को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया है।

आदेश आ गया है, देखा नहीं है

महापौर अभय दरे के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल करने को लेकर आदेश शासन से आ गया हैै। हालांकि मैने अभी आदेश पढ़ा नहीं है, लेकिन अधिकार वापस कर दिए गए हैं।

-अनुराग वर्मा, आयुक्त नगर निगम सागर

सच की जीत है, जांच में बेदाग निकले

महापौर अभय दरे के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार वापस करने का आदेश आ गया है। यह सच की जीत है। निर्णय स्वागत योग्य है, विलंब जरूर हुआ लेकिन अंतत: सत्य की विजय हुई और महापौर बेदाग साबित हुए। उनकी वापसी से निगम में जनहित के कार्यों को गति मिलेगी।

-शैलेंद्र जैन, विधायक, सागर

सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं

विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से अधिकारी बहाली का आदेश जारी होने की जानकारी मिली है। अभी आदेश मैंने देखा नहीं है। सागर से बाहर हूं, फोन पर जानकारी दी गई है। जांच में मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार पाए गए हैं। मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह एवं परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह, विधायक शैलेंद्र जैन सहित संगठन का मैं आभारी हूं। मुझ पर पार्टी संगठन ने जो विश्वास जताया है उसके लिए मैं कृतज्ञ हूं। - अभय दरे, महापौर, नगर निगम सागर

30 पेज का आदेश, हर आरोप खारिज

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार महापौर अभय दरे के अधिकार बहाली को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्वत ने जो आदेश जारी किया है वह करीब 30 पेज का आदेश है। उसमें दरे पर लगाए गए एक-एक आरोप को खारिज कर दिया गया है। इतना ही नहीं यह भी उल्लेख है कि उन पर जेसीबी भुगतान में जो 25 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगा था वह निराधार है।

उन्होंने उक्त करीब 10 लाख के बिल में करीब 3 लाख की कटौती कर निगम का उल्टा फायदा पहुंचाया है। सबसे खास बात महापौर के खिलाफ उन्हें पद से हटाने के लिए नगर पालिक निगम एक्ट की धारा 19 ख के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही थी। उसे सिरे से खारिज कर दिया गया है।

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