राजीव गांधी व नरसिम्हाराव ने रिहा करवाया था एंडरसन को!Updated: Tue, 24 Mar 2015 04:02 AM (IST)

एंडरसन को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और केंद्रीय गृहमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के निर्देश पर ही रिहा किया गया था।

मो. फैजान खान, भोपाल। यूनियन कार्बाइड गैस कांड के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और केंद्रीय गृहमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के मौखिक निर्देश पर ही रिहा किया गया था। इसकी पुष्टि 'यूका जहरीली गैस कांड जांच आयोग' ने अपनी रिपोर्ट में की है।

जस्टिस एसएल कोचर की अध्यक्षता में अगस्त 2010 में गठित आयोग पांच साल की गहन जांच, बयानों और सबूतों के आधार पर तैयार अपनी रिपोर्ट 24 फरवरी को प्रदेश के मुख्य सचिव अंटोनी जेसी डिसा को सौंप चुका है। हालांकि शासन ने अब तक रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।

नवदुनिया को अधिकारिक सूत्रों से रिपोर्ट के कुछ खास अंश प्राप्त हुए हैं, जिसमें कई अह्‌म बातें सामने आई हैं। सूत्रों का मानना है कि जांच आयोग की रिपोर्ट अगर सरकार सार्वजनिक कर इसकी अनुशंसाओं का पालन करे तो गैस पीड़ितों को लाभ मिल सकता है।

आयोग ने तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह और तत्कालीन एसपी स्वराज पुरी को रिपोर्ट में क्लीन चिट दी है। सिंह व पुरी पर भी एंडरसन को भोपाल से भगाने का आरोप था। जिसे लेकर आयोग का मानना है कि दोनों अधिकारियों ने केवल अपने उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया है। इसमें उनका कोई दोष नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजीव गांधी व नरसिम्हाराव के मौखिक आदेश पर तत्कालीन केन्द्रीय कैबिनेट सचिव ने मप्र शासन के मुख्य सचिव ब्रह्मस्वरूप को फोन पर एंडरसन को छोड़ने के आदेश दिए।

तत्कालीन मुख्य सचिव ने थाना हनुमानगंज फोन करके उस समय के टीआई सुरेन्द्र सिंह को मौखिक निर्देश दिए कि वारेन एंडरसन को जमानत दे दी जाए। जमानत के बाद ही मुख्य सचिव के निर्देश पर एसपी स्जराज पुरी एंडरसन को एयरपोर्ट लेकर गए।

सिंह आयोग की जांच भी खोलती कई राज

आयोग की रिपोर्ट में यह बताया गया कि तत्कालीन केन्द्र सरकार के निर्देश पर ही गैस कांड की जांच के लिए बने जस्टिस एनके सिंह कमीशन की जांच बंद करा दी गई थी। राज्य सरकार ने गैस कांड के तीसरे दिन इसका गठन किया था, लेकिन बाद में इसको एक्सटेंशन नहीं दिया गया, जिससे आयोग अपनी जांच पूरी नहीं कर सका। अगर यह जांच पूरी होती तो उस समय कई राज खुल सकते थे।

मुआवजे के लिए कानून की अनुशंसा

आयोग ने देश में मुआवजे को लेकर कानून बनाने की भी अनुशंसा की है। कानून के अभाव में गैस पीड़ितों को उचित मुआवजे से वंचित रहना पड़ा था। देश में इस तरह के हादसों के लिए मुआवजे का कोई कानून नहीं है। वर्ष 1882 में इंग्लैंड में हुए एक मामले के बाद अमेरिका व कनाडा में तो इसके आधार पर कानून बन गए, लेकिन हमारे देश में मुआवजे का कोई कानून नहीं बना। इसका खामियाजा गैस पीड़ितों को भुगतना पड़ा।

मुझे कुछ नहीं कहना

आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। मुझे रिपोर्ट को लेकर कुछ नहीं कहना है। जस्टिस एसएल कोचर, अध्यक्ष गैस कांड जांच आयोग

रिपोर्ट के तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। के. सुरेश, प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग

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