निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को मिलेगा अस्थाई एडमिशनUpdated: Tue, 29 Sep 2015 11:37 PM (IST)

प्रदेश के निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में स्टेट कोटे की सीटों पर उम्मीदवारों को अस्थाई एडमिशन दिया जाएगा।

भोपाल। प्रदेश के निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में स्टेट कोटे की सीटों पर उम्मीदवारों को अस्थाई एडमिशन दिया जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश पर संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) ने सभी डीन को पत्र लिखकर प्रोवीजनल एडमिशन देने के लिए कहा है। प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीबीएस व बीडीएस की सीटें दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों से भरने को लेकर मप्र के मूल निवासी करीब 40 उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में हाल ही में याचिका दायर की है।

कोर्ट ने मप्र शासन और संचालक चिकित्सा शिक्षा से पूछा है कि स्टेट कोटे की सीटों पर दूसरे राज्योंे के कितने उम्मीदवारों को किस आधार पर एडमिशन दिया गया है। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ.जीएस पटेल ने बताया कि इस मामले 14 अक्टूबर को कोर्ट को जवाब पेश करना है। बता दें कि जीएमसी में भोपाल में चल रही एआईपीएमटी की दूसरे दौर की काउंसलिंग में निजी कॉलेजों में स्टेट कोटे की अनरिजर्व श्रेण्ाी की सीटें दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों से भरने पर मध्यप्रदेश के उम्मीदवरों ने तीन दिन तक हंगामा किया था। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि निजी कॉलेजों में स्टेट कोटे की अनरिजर्व श्रेणी की सीटों को दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों से भरने को लेकर कभी कोई बंदिश नहीं रही है। इस साल के प्रवेश नियम में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हर साल बढ़ रहे दूसरे राज्यों के उम्मीदवार

निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट कोटे की एमबीबीएस की कुल 377 सीटें हैं। इनमें अनरिजर्व श्रेणी की 189 हैं। पहले दौर की काउंसलिंग में 42 और दूसरे राउंड में 60 सीटों दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों ने दाखिला ले लिया है। इसके पहले अन्य सालों में कम उम्मीदवार दूसरे राज्यों के होते थे। इस साल बाहरी छात्र ज्यादा आने से मप्र के उम्मीदवार नाराज हैं। उनका कहना है कि महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में पहली प्राथमिकता अपने राज्यों के उम्मीदवारों को दी जाती है।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.