आरक्षकों व एएसआई ने डीजीपी के सामने खुलकर रखी अपनी पीड़ाUpdated: Sat, 22 Apr 2017 07:53 PM (IST)

'सर...समस्या यह है कि थानों में एफआईआर की विवेचना का काम जो टीआई साहब का है, वह तो वे कर नहीं रहे हैं।

भोपाल। 'सर...समस्या यह है कि थानों में एफआईआर की विवेचना का काम जो टीआई साहब का है, वह तो वे कर नहीं रहे हैं। सारे काम निचले स्तर पर छोड़ दिए जाते हैं। विवेचना या कार्रवाई के दौरान कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं का दबाव इतना बन जाता है कि काम प्रभावित होता है।"

कुछ इस तरह की समस्याएं व बातें प्रदेशभर से आए आरक्षकों व एएसआई ने डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला के सामने रखीं। मौका था शनिवार को पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) में आयोजित डीजीपी से सीधे संवाद कार्यक्रम का। इसमें 25 जिलों से पुलिसकर्मियों को बुलाकर डीजीपी ने करीब दो घंटे सभी पुलिसकर्मियों की समस्याएं सुनी और जल्द ही उन्हें दूर करने का आश्वासन भी दिया।

मुखबिरों के लिए बजट नहीं

पुलिसकर्मियों ने बताया कि मुखबिरों से खबर मिलना लगभग बंद हो रही हैं। उनके लिए पैसे नहीं हैं। बजट तो मिलता है, लेकिन मुखबिरों को देने के लिए मांगो तो मना कर दिया जाता है। कार्य विभाजन में भी भेदभाव हो रहा है। साहब लोगों के खास को कम और अन्य पर ज्यादा काम लाद दिया जाता है। थाने में तकनीकी ज्ञान वालों की खासी कमी है, जिन्हें ज्ञान है भी वो कोई काम नहीं करते, टालते ही रहते हैं।

नहीं मिल रहा साप्ताहिक अवकाश

पुलिसकर्मियों ने कहा कि आपके साप्ताहिक अवकाश के प्रावधान का भी पालन नहीं हो रहा। कई जगह जहां काम कम है, वहां भी जानबूझकर अवकाश नहीं दिया जाता।

ये परेशानी व कमियां रखीं सामने

- थानों में अपराध पंजीयन को टालने की मानसिकता अभी भी बड़ी बाधा है।

- एक कॉन्स्टेबल विवेचना भी करे और कानून व्यवस्था भी देखे, इससे समस्या होती है।

- अभियोजन के लिए सहयोग नहीं मिलता।

- जिला स्तर पर ड्यूटी लगती है तो रुकने की व्यवस्था नहीं होती।

- सीसीटीएनएस में भी कई खामियां हैं।

- थानों में पीड़ित महिला/बालकों के लिए सुविधा नहीं है।

- विवेचना में विवेचक पर भी खर्च का बोझ आ जाता है।

- फॉरेसिंक एवं विवेचना दल में सामंजस्य का अभाव है।

- गलती होने पर सारा भार विवेचक पर, लेकिन सुधार के लिए कोई अवसर नहीं मिलते।

- बड़े आपराधिक प्रकरणों में राज्य से बाहर जाने के लिए कम लोगों का चयन होता है।

ये सुझाव भी दिए

- विवेचक को उसकी क्षमता के अनुसार ही विवेचना दी जाए।

- विवेचना में अभियोजन का लिखित मार्गदर्शन अनिवार्य हो।

- छोटी-छोटी गलतियों की बड़ी सजा मिलती है, इसे रोकना चाहिए।

- पुलिसकर्मियों के बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु संभागीय स्तर पर आवास संबंधी सुविधा हो।

- अनुसंधान और कानून व्यवस्था के लिए अलग-अलग दल हों।

- डायल 100 में पुलिसकर्मियों के बच्चों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए।

- ड्यूटी के घंटे निश्चित किए जाएं व अतिरिक्त कार्य का ओवरटाइम दिया जाए।

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