माता-पिता रहें सावधान : 12 साल के भी हो रहे डायबिटीज के शिकार, ये है कारणUpdated: Wed, 15 Nov 2017 04:10 AM (IST)

30-40 साल की उम्र में ही डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी होने लगी है।

भोपाल। खाने-पीने की बात पर अभी तक यही कहा जाता था कि 40 साल की उम्र तक खा लो। इसके बाद संयम रखना होगा। लेकिन ये बात झूठी लगने लगी है। इसकी वजह यह कि 30-40 साल की उम्र में ही डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी होने लगी है। इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि ओपीडी में आने वाले डायबिटीज के कुल मरीजों में 30 से 40 फीसदी कम उम्र के हैं।

हमीदिया अस्पताल के इंडोक्रायनोलॉजिस्ट डॉ. सचिन चित्तावर ने कहा कि कम उम्र के लोगों में तेजी से यह बीमीरी हो रही है। ओपीडी में करीब एक तिहाई मरीज इसी उम्र के होते हैं। हाल ही में 12 साल की उम्र वाले एक बच्चे को डायबिटीज निकला है। उसका वजन 80 किलो है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में डायबिटीज होने की सबसे बड़ी वजह मोटापा है। फैट वाली चीजें ज्यादा खाने से मोटापा बढ़ रहा है।

हमीदिया अस्पताल के एक अन्य डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. मनुज शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक जीन की पहचान भारत के लोगों में की गई है। यह इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। हालांकि, अभी इस पर और रिसर्च चल रहा है। इस तरह के अन्य जीन की पहचान होने कई मरीजों डायबिटीज से बचाया जा सकेगा।

40 फीसदी मरीज बीच में ही छोड़ देते हैं इलाज

डायबिटीज के विशेषज्ञ डॉ. सचिन गुप्ता ने बताया कुछ मरीजों इलाज से फायदा हो जाता है। शुगर का स्तर कंट्रोल होते ही उन्हें लगता है कि डायबिटीज हमेशा के लिए चला गया और वे दवा छोड़ देते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। इस दौरान उनका शुगर लेवल तेजी से बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 फीसदी मरीज इलाज छोड़ देते हैं।

डायबिटीज के लक्षण

भूख ज्यादा लगना, प्यास ज्यादा लगना, वजन कम होना, मुंह सूखना। ज्यादा दिन होने पर दिखाई कम देना और पैरों में सुन्नपन।

कम उम्र में होने की वजह

व्यायाम न करना, तनाव, ज्यादा फैट वाला खान-पान, माता-पिता या दोनों को डायबिटीज होना ।

जागरूकता के लिए चिनार पार्क से जेपी अस्पताल तक निकली रैली

डायबिटीज को लेकर जागरूकता के लिए चिनार पार्क से जेपी अस्पताल तक रैली निकाली गई। इसमें नर्सिंग स्टूडेंट, डॉक्टर, जेपी अस्पताल का स्टाफ भी शामिल हुए। सीएमएचओ डॉ. सुधीर जेसानी ने बताया कि कई मरीजों को सालों तक डायबिटीज रहता है, पर उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं होती। जांच में उनका शुगर का स्तर काफी बढ़ चुका होता है। जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आईके चुघ ने बताया कि बिल्कुल शुरुआती स्तर में अगर इस बीमारी का पता चल जाए तो कई मरीजों कुछ दिन की दवा के बाद ठीक हो जाते हैं। उन्हें हमेशा दवा नहीं लेना होती। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रमोद चंद्रा भी मौजूद थे।

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