नौकरी के लिए विदेश जाने वालों को नहीं लगाने पड़ेंगे दिल्ली के चक्करUpdated: Sat, 15 Jul 2017 10:55 PM (IST)

अब अपने दस्तावेजों पर सील-ठप्पा(अटेसटेशन एंड एप्पोस्टाइल) लगवाने दिल्ली के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

राजीव सोनी, भोपाल। नौकरी के लिए विदेश जाने वाले हजारों लोगों को अब अपने दस्तावेजों पर सील-ठप्पा(अटेसटेशन एंड एप्पोस्टाइल) लगवाने दिल्ली के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजधानी में बनने वाले विदेश भवन में ही यह औपचारिकता पूरी होने लगेगी।

विदेश मंत्रालय के सभी दफ्तर एक ही छत के नीचे आ जाएंगे। भोपाल में विदेश भवन को हरी झंडी मिल गई है अगले सप्ताह इंजीनियरों की टीम योजना को अंतिम रूप देने आ रही है।

मध्यप्रदेश के लगभग सभी जिलों से हर साल बड़ी संख्या में युवा विदेशों में नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं। जिन लोगों को विदेशों में नौकरी का अवसर मिलता है, उन्हें अपने दस्तोवेजों पर विदेश मंत्रालय से'अटेसटेशन एंड एप्पोस्टाइल" (प्रमाणीकरण) कराना अनिवार्य होता है।

इस औपचारिकता के लिए संबंधित व्यक्ति को दिल्ली के चक्कर लगाना पड़ते हैं। भोपाल में विदेश भवन बनने के बाद यह सुविधा यहीं मिलने लगेगी।

भोपाल-इंदौर से सबसे ज्यादा लोग

विदेशों में नौकरी के लिए वैसे तो प्रदेश के सभी जिलों के लोग जाते हैं लेकिन इनमें राजधानी भोपाल एवं इंदौर (मालवा अंचल) के लोगों की संख्या ज्यादा रहती है। सबसे ज्यादा पासपोर्ट बनवाने वाले इंदौर क्षेत्र से ही आते हैं। पासपोर्ट अधिकारी के मुताबिक पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या हर साल औसतन 20 फीसदी बढ़ रही है।

यह भी होगा विदेश भवन में

विदेश मंत्रालय के सभी कार्यालय अब एक ही छत के नीचे काम करने लगेंगे। भोपाल में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) का रीजनल आफिस भी काम कर रहा है। यह दफ्तर भी बाणगंगा से उठकर विदेश भवन में शिफ्ट हो जाएगा। पासपोर्ट सेवा केन्द्र एवं पासपोर्ट आफिस के अलावा 'अटेसटेशन एंड एप्पोस्टाइल" के लिए विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अफसर भी बैठने लगेंगे। वीजा संबंधी प्रारंभिक जानकारी भी विदेश भवन से हासिल होने लगेगी।

भवन का नक्शा होगा फायनल

विदेश मंत्रालय दिल्ली से आने वाली इंजीनियरों की टीम में अधीक्षण एवं कार्यपालन यंत्री स्तर के अधिकारी रहेंगे। ये लोग भवन का आर्किटेक्चर के अलावा निर्माण संबंधी कई प्रस्तावों को अंतिम रूप देंगे। इस अवसर पर विदेश भवन के नक्शे को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद तुरंत ही निर्माण कार्य के लिए टैंडर की कार्रवाई कर दी जाएगी।

हर साल डेढ़ लाख पासपोर्ट

मध्यप्रदेश में हर साल डेढ़ लाख से अधिक लोग पासपोर्ट बनवाते हैं। इनमें से हजारों ऐसे लोग जो दूसरे देशों में रोजगार के लिए जाते हैं। उच्च शिक्षा के लिए जाने वालों की संख्या भी हजारों में है। विदेश भवन बनने के बाद ऐसे लोगों को दस्तावेजों पर 'अटेशटेशन एंड एप्पोस्टाइल" की सुविधा शुरू हो जाएगी।

-मनोज कुमार राय, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी

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