अंगूठे के निशान से परखेंगे मेडिकल छात्र की सच्चाईUpdated: Mon, 26 Jun 2017 07:53 PM (IST)

प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में पीजी कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों के अंगूठे के निशान लिए जाएंगे।

भोपाल। प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में पीजी कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों के अंगूठे के निशान लिए जाएंगे। इस आधार पर उनका सत्यापन किया जाएगा कि कोई छात्र फर्जी तो नहीं है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) सभी छात्रों की बायोमीट्रिक अटेंडेंस के जरिए पहचान करेगा। पहली बार यह व्यवस्था की जा रही है।

अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसमें यह पता किया जा सके कि कॉलेज में दाखिला लेने वाला छात्र वही है जिसने एनबीई द्वारा आयोजित नीट पीजी (नेशनल एलिजबिलटी कम एंट्रेस टेस्ट) दी है। एडमिशन के दौरान काउंसलिंग कमेटी द्वारा कागज पर छात्रों के फिंगर प्रिंट लिए जा रहे थे, लेकिन इसका मिलान नहीं हो पा रहा था, क्योंकि परीक्षा में बैठने वाले छात्रों का बायोमीट्रिक डाटा चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के पास नहीं होता था। भविष्य में कोई जरूरत पड़े इसलिए कागज पर निशान लिए जा रहे थे।

अब एनबीई खुद छात्रों का वेरीफिकेशन करने जा रहा है। वेरीफिकेशन के लिए एनबीई की टीम निजी व सरकारी सभी कॉलेजों में जाएगी। जुलाई में वेरीफिकेशन पूरा हो जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी कॉलेजों को एनबीई के टीम का सहयोग करने के लिए कहा है।

इसलिए पड़ी जरूरत

मध्यप्रदेश में एमबीबीएस कोर्स में मुन्नाभाइयों के पकड़े जाने के बाद से व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने तीन स्तरों में बायोमीट्रिक सिस्टम शुरू किया था। सबसे पहले प्रवेश परीक्षा के समय, उसके बाद काउंसलिंग के दौरान व फिर कॉलेज में दाखिले के समय। नीट से दाखिला शुरू होने के बाद यह सिस्टम बंद हो गया। वजह, नीट यूजी व पीजी परीक्षा क्रमश: सीबीएसई व एनबीई कराती है।

दोनों संस्थाओं से छात्रों का बायोमीट्रिक रिकार्ड चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को नहीं मिल रहा था। अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया व एनबीर्ई के बीच बैठक के बाद छात्रों का बायोमीट्रिक वेरीफिकेशन कराने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद इसका ब्यौरा एमसीआई और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें छात्रों की रेटिना भी स्कैन की जाएगी।

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