मादा शावक को दिल्ली की महिला ने लिया गोद, उठाएगी परवरिश का खर्चUpdated: Wed, 06 Dec 2017 11:13 PM (IST)

तेंदुए की नन्हीं मादा शावक नरसिंह बानो को दिल्ली की रहने वाली महिला राधा अहलुवालिया ने गोद ले लिया है।

भोपाल। वन विहार नेशनल पार्क में पल रही तेंदुए की नन्हीं मादा शावक नरसिंह बानो को दिल्ली की रहने वाली महिला राधा अहलुवालिया ने गोद ले लिया है। इसके लिए महिला ने मप्र टाइगर फाउंडेशन सोसायटी को एक लाख रुपए दिए हैं।

यह राशि नरसिंह बानो की परवरिश पर खर्च की जाएगी। बता दें कि शावक जन्म के बाद नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा जंगल में मां से बिछड़ गई थी। जिसे वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। 3 नवंबर से शावक को वन विहार में रखा जा रहा है।

वन विहार की डायरेक्टर समीता राजोरा ने बताया कि राधा अहलुवालिया इनसाइट बियांड इनफॉरमेशन नामक कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे बीते दिनों भोपाल आईं थी। उन्होंने मादा शावक नरसिंह बानो के बारे में अखबारों में खबरें पढ़ी थी वे वन विहार पहुंची और उन्होंने शावक को एक साल के लिए गोद लेने की इच्छा जताई।

इसके आधार पर शावक को गोद देने की प्रक्रिया पूरी की गई और एक साल के लिए गोद दे दिया गया। यानी एक साल तक नरसिंह बानो के इलाज, उसे दी जाने वाली डाइट आदि का खर्च राधा अहलुवालिया उठाएंगी। शावक की परवरिश पहले की तरह वन विहार में ही डॉक्टर करेंगे।

ऐसे पड़ा नरसिंह बानो नाम

शावक नरसिंहपुर के जंगल में मिली थी। उस समय वह 3 से 5 महीने की थी। यानी उसका जन्म नरसिंहपुर के जंगल में हुआ था। इस आधार पर वन विहार प्रबंधन ने उसका नाम जन्म स्थल के आधार पर नरसिंह बानो रखा है।

वन विहार में ऐसे की जा रही परवरिश

नरसिंह बानो को इनक्लोजर में रखा गया है। उसकी देखरेख के लिए दो वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई है जो चौबीसों घंटे उसका ख्याल रखते हैं। इसके वन विहार के डॉ. अतुल गुप्ता उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। वह डाइट में जिंदे मुर्गे खाना पसंद करती था। अब उसे मांस खिलाने की आदत डाली जा रही है।

मैं दिल्ली में प्रदूषण से चिंतित हूं, इसलिए प्रकृति और वन्यजीवों को बचाना चाहती हूं

मैंने जम्मू कश्मीर की वादियों में प्रकृति को करीब से देखा है। अब दिल्ली में प्रदूषण से चिंतित हूं। ऐसा लगता है कि कोई ठोस कदम नहीं उठाएं तो आने वाली पीढ़ी के लिए स्वस्थ प्रकृति और जंगल नहीं बचेंगे। मैं मानती हूं कि प्रकृति को बचाने में वन्यप्राणियों की अहम भूमिका होती है और यह मेरे विवेक से सही भी है क्योंकि मैंने महसूस किया है कि जहां प्राकृतिक जंगल होंगे वहां वन्यप्राणियों की बसाहट होगी।

इन दोनों के मौजूद रहने से हमें स्वस्थ्ा वातावरण मिलेगा और प्रदूषण जैसी समस्याओं से काफी हद तक निपटा जा सकेगा। इसके लिए वन्यप्राणियों को सहेजकर रखना जरूरी है ताकि जंगल बचा रहे। भले ही मैं सभी वन्यप्राणियों को गोद नहीं ले सकती, पर नन्हें शावक की परवरिश में आने वाले खर्च में अपना योगदान देकर प्रकृतिक और वन्यप्राणियों के प्रति अपना फर्ज अदा करना चाहती हूं। यह एक छोटा संकल्प है लेकिन आज के परिवेश में इसकी जरूरत है। (जैसा कि एसडीओ रजनीश कुमार सिंह वन्यप्राणी मप्र को राधा अहलुवालिया ने शावक को गोद लेने से पहले बताया )

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