ऐसे शिकार करना सीख रही मादा शावक, उसे पसंद है जिंदा मुर्गाUpdated: Thu, 16 Nov 2017 04:03 AM (IST)

नरसिंहपुर के जंगल में मां से बिछड़ी तेंदुए की मादा शावक नरसिंह बानो वन विहार में शिकार करना सीख रही है।

भोपाल। नरसिंहपुर के जंगल में मां से बिछड़ी तेंदुए की मादा शावक नरसिंह बानो वन विहार में शिकार करना सीख रही है। उसे जिंदा मुर्गा खूब पसंद आ रहा है। वह इनक्लोजर में मुर्गे को देखते ही सक्रिय हो जाती हैं और कुछ ही मिनट में उसे अपना शिकार बना लेती है। नरसिंह बानो की खासियत है कि वह मीट नहीं खाती। इसलिए प्रबंधन उसे चिकन परोसता है। इसमें भी वह कटा हुआ चिकन खाना पसंद नहीं करती। इसके चलते उसके कमरे में जिंदा मुर्गा या मुर्गी छोड़ी जा रही है जिसे वह आसानी से खा लेती है।

बता दें कि अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नरसिंहपुर से नरसिंह बानो को वन विहार शिफ्ट किया है। प्रबंधन ने उसे विशेष बाड़े में रखा है जहां चौबीस घंटे उसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। वह अभी स्वस्थ और उसका वजन करीब 6 किलो हो चुका है। उसकी देखरेख के लिए डायरेक्टर समीता राजौरा ने अलग से स्टाफ की तैनाती की है जो उसे सुबह के समय खाने के लिए जिंदा मुर्गा या मुर्गी देते हैं। वह इन मुर्गा और मुर्गियों पर खुले जंगल की तरह हमला करने की आदि हो गई हैं।

मीट की तरफ देखती तक नहीं

नरसिंह बानो को चिकन के साथ-साथ मीट परोसा जा रहा है लेकिन वह मीट खाना पसंद नहीं कर रही है। उसकी देखरेख करने वाले स्टाफ का कहना है कि नरसिंह बानों को आगे चलकर मीट ही खाना पड़ेगा, इसलिए अभी उसे मीट की आदती डाली जा रही है लेकिन उसे मुर्गा व मुर्गी ही पसंद है। फिर भी रोजाना उसके बाड़े में 100 से 150 ग्राम मीट रखा जा रहा है।

ऐसे पड़ा नरसिंह बानो नाम

मादा शावक नरसिंहपुर के जंगल में मिली है इसलिए प्रबंधन ने उसका नाम नरसिंह बानो रखा है। अब उसे नरसिंह बानो के नाम से ही जाना जाएगा। वन विहार प्रबंधन इसके पहले भी कई वन्यप्राणियों का नामकरण कर चुका है। प्रबंधन ये नाम वन्यप्राणियों के व्यवहार या उनके मूल स्थान के नाम पर ही रखता है। जैसे पूर्व में होशंगाबाद के जंगल में उत्पात मचाने वाली बाघिन का नाम शिफ्टिंग के बाद मटककली रखा गया था।

वृंदा की हालत नाजुक, चौबीस घंटे की जा रही देखरेख

इधर छह महीने पहले गुवाहाटी से वन विहार लाए गए चार शेरों में शामिल मादा शेरनी वृंदा की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उसकी देखरेख कर रही हैं। बता दें कि शेरनी का लीवर खराब हो चुका है।

शिकार करने की आदत पड़ जाएगी

अभी नरसिंह बानो स्वस्थ है। हम भी चाहते हैं कि वह खुले जंगल के वन्यप्राणियों की तरह सक्रिय रहें। बीमार शेरनी वृंदा की देखरेख कर रहे हैं - समीता राजौरा, डायरेक्टर वन विहार नेशनल पर्क, भोपाल

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