भोपाल गैस त्रासदी : 30 साल बाद भी इलाज को भटक रहे पीड़ितUpdated: Sun, 30 Nov 2014 01:30 PM (IST)

भोपाल गैस त्रासदी के 30 वर्ष गुरने के बाद गैस पीड़ितों को अगर सबसे ज्यादा किसी चीज की जरूरत पड़ी है, तो वह चिकित्सा है।

गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल बने, पर नहीं मिल पा रही राहत

भोपाल (नप्र)। गैस कांड की भयावह त्रासदी को 30 साल पूरे होने जा रहे हैं। इन 30 वर्षों में गैस पीड़ितों को अगर सबसे ज्यादा किसी चीज की जरूरत पड़ी है, तो वह चिकित्सा है। गैस पीड़ितों के इलाज के लिए अस्पतालों की बड़ी-बड़ी बिल्डिंग खड़ी कर दी गईं, लेकिन इन अस्पतालों में आज भी इलाज के लिए गैस पीड़ितों को भटकना पड़ रहा है। वहीं डॉक्टरों की कमी के कारण गैस पीड़ितों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।

गैस कांड की मुख्य आरोपी कंपनी यूनियन कार्बाइड की संपत्तियां नीलाम कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बने भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर की स्थिति सबसे खराब है। इस अस्पताल को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाया गया था, ताकि गैस पीड़ितों को हर बीमारी का उच्च स्तरीय इलाज मिल सके। लेकिन वर्तमान में बीएमएचआरसी में कंसल्टेंट की भारी कमी है,जिससे गैस पीड़ितों को साधारण इलाज के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

बीएमएचआरसी का संचालन केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आने वाली आईसीएमआर संस्था करती है। आईसीएमआर की लेटलतीफी के चलते अस्पताल की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ी जा रही है। हालांकि हाल ही में सात कंसल्टेंट की नियुक्ति हुई है,लेकिन अभी भी लगभग आधे पद खाली पड़े हैं। वहीं उपकरण आने में भी देरी हो रही है।

इसके चलते अस्पताल में न्यूरोलॉजी, गेस्ट्रो सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी आदि विभागों में मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। डायलेसिस पर चल रहे मरीजों की देखरेख के लिए सप्ताह में एक दिन बाहर से नेफ्रोलॉजिस्ट बुलाना पड़ रहा है। अस्पताल की बेड आक्यूपेंसी भी लगभग आधी हो गई है।

आधे से ज्यादा बिस्तर खाली

बीएमएचआरसी के अलावा गैस पीड़ितों के इलाज के लिए गैस राहत विभाग के 6 अस्पताल व 9 डे केयर यूनिट हैं। इन सभी की स्थिति भी दयनीय है। कमला नेहरू अस्पताल को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया गया था। लेकिन अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉस्टि, मनोचिकित्सक व स्पेशलिस्ट सर्जन नहीं है। इससे कमला नेहरू अस्पताल में आने वाले मरीजों को भोपाल मेमोरियल अस्पताल या हमीदिया अस्पताल भेज दिया जाता है।

कमला नेहरू अस्पताल में कुल 219 बिस्तर हैं,लेकिन एक समय में 60 से 65 मरीज ही भर्ती रहते हैं। 26 नवंबर की स्थिति में अस्पताल में केवल 57 मरीज भर्ती हैं। करीब तीन चौथाई बिस्तर खाली पड़े रहते हैं।

गैस राहत के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में 125 बिस्तर हैं,जिसमें से लगभग 50 बिस्तरों पर ही मरीज भर्ती रहते हैं। पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर के 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में एक समय में 10 से 12 मरीज ही भर्ती होते हैं। इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य चिकित्सालय 150 बिस्तरों में लगभग आधे खाली रहते हैं। इससे साफ है कि गैस पीड़ित मरीजों का गैस राहत अस्पतालों से मोहभंग हो रहा है। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।

गैस पीड़ितों में श्वास रोगी सबसे ज्यादा

यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस ने सबसे ज्यादा लोगों के फैफड़ों पर प्रभाव डाला था। जिससे गैस पीड़ितों में सबसे ज्यादा रोगी पल्मोनरी डिसीज के हैं। लेकिन भोपाल मेमोरियल अस्पताल सहित गैस राहत के सभी 6 अस्पतालों में एक भी पल्मोनरी स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। इन मरीजों को साधारण उपचार से ही संतुष्ठ होना पड़ता है।

बीएमएचआरसी की स्थिति सुधर रही है। कुछ कंसल्टेंट आए हैं। आगे और भी आएंगे। अस्पताल प्रबंधन गैस पीड़ितों के लिए समर्पित है। यहां आने वाले सभी मरीजों को उचित इलाज दिया जा रहा है। डॉ. मनोज पांडेय, डायरेक्टर, भोपाल मेमोरियल अस्पताल

गैस राहत अस्पतालों में जितने भी मरीज आते हैं,उन्हें बेहतर इलाज दिया जाता है। जिन मरीजों को भर्ती करने की जरूरत होती है,उन्हें भर्ती भी किया जाता है। डॉ.रविशंकर वर्मा, सीएमएचओ, गैस राहत

गैस कांड में मेरे पति सरवन साहू की मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्हें जीवन ज्योति कॉलोनी ( विधवा कालोनी) में क्वार्टर आवंटित किया गया था। इन क्वार्टर में रहना नर्क भोगने जैसा है। पूरा क्वार्टर गटर के पानी से घिरा रहता है। नलों में पानी कम और गंदा आता है। पिछले कई महीनों से गैस विधवा पेंशन भी नहीं मिली है।शकुंतला बाई, गैस पीड़ित

उनके घर के पीछे सीवेज लाइन फूटी हुई है। सीवेज का पानी घर के अंदर घुसता है,जिसके साथ गटर के कीड़े भी आ जाते हैं। रसोई घर तक यह कीड़े पहुंच जाते हैं। गंदगी की वजह से रहना मुहाल हो गया है। कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। - आयशा बी, गैस पीड़ित

मैं और मेरे परिवार को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है। अस्पतालों में ठीक से इलाज नहीं मिलता। कहीं अच्छे डॉक्टर नहीं हैं, तो कहीं दवाएं नही रहतीं। दूसरे गैस पीड़ितों का भी यही हाल है। सरजू बाई, गैस पीड़ित

मैंने जो खोया उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। गैस पीड़ितों को मुआवजे के साथ ही इलाज समेत अन्य सुविच्चाएं दी जानी चाहिए। मासूम बी, गैस कांड में अपना पति खोने वाली

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