30 साल होने जा रहे भोपाल गैस त्रासदी कोUpdated: Sun, 30 Nov 2014 04:20 PM (IST)

2 व 3 दिसंबर, 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी गैस ने तबाही मचा दी थी।

भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी को 30 साल होने जा रहे हैं। 2 व 3 दिसंबर, 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी गैस ने तबाही मचा दी थी। इससे हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इतने साल बाद भी गैस पीड़ितों की समस्याएं अब भी बरकरार हैं। उन्हें बेहतर इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। कई लोग अब भी मुआवजे के लिए परेशान हैं।

2 अप्रैल 2013- सीबीआई ने सीजेएम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करके कहा कि अमेरीका के स्टेट एंड जस्टिस डिपार्टमेंट ने एंडरसन के प्रत्यार्पण पर कोई निर्णय नहीं लिया है। यह मामला अभी भी विचारधीन है।


नई दिल्ली - वर्ष 1984 भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार अमेरिकी मूल कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमेन वारेन एंडरसन को मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश पर 7 दिसंबर 1984 को गिरफ्तार किए जाने के बाद ही रिहा किया गया था।

गैस त्रासदी के बारे में इस तथ्य को 8 दिसंबर 1984 के सीआईए दस्तावेजों से पता चला है। यह बात है एंडरसन यूनियन कार्बाइड के भोपाल प्लांट से लीक घातक मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस के पांच दिन बाद और उसके भारत छोड़ने के एक दिन बाद।

दस्तावेजों के मुताबिक एंडरसन की जल्दी रिहाई के लिए प्रधानमंत्री राजीव गांधी की केंद्र सरकार द्वारा आदेश दिया गया था। उस दौरान चुनाव भी होने थे, केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ने यूनियन कार्बाइड के खिलाफ राजनीतिक फायदा उठाने के मकसद से यह निर्देश दिए थे।

केंद्र सरकार को लगा था कि गैस त्रासदी के बाद जनता के दबाव से बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विशेष रूप से अमेरिकी कंपनियों के साथ विदेशी निवेश को विकसित करने में सावधानी से एक नई सरकार को मजबूर कर देगी।

दस्तावेजों के मुताबिक चुनाव पास आने के साथ, राज्य और केंद्र में राजनेताओं यूसीआईएल (यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड) के लिए खुद के दोष से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है और मूल कंपनी से मुआवजा एंठ रहे थे। गैस रिसाव के समय में भोपाल के जिला कलेक्टर मोती सिंह थे। एंडरसन को 7 दिसंबर को लगभग 2 बजे गिरफ्तार किया गया था लेकिन उसे उसी दिन रिहा किया गया था और नई दिल्ली के लिए राज्य सरकार के विशेष विमान में भोपाल से बाहर उड़ाकर ले गए थे।

सिंह ने दावा किया कि राज्य सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव ने एंडरसन को रिहा करने का आदेश दिया था।

1984 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह थे। माना जा रहा है सिंह के ही निर्देश पर मुख्य सचिव ने एंडरसन को रिहा करने के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि एंडरसन पर सदोष मानव हत्या, गंभीर हमले, मनुष्य और जानवरों को जहर देने का आरोप था।

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