बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद यह बोल गए अनुपम खेरUpdated: Mon, 20 Mar 2017 05:14 PM (IST)

अनुपम खेर ने कहा कि वह भाई-भतीजावाद से जुड़ी बहस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं।

नई दिल्ली। जानेमाने अभिनेता अनुपम खेर ने सेंसर बोर्ड को नसीहत देते हुए कहा कि उसे अपनी नियम पुस्तिका पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। खेर के मुताबिक सेंसर बोर्ड के नियम छह दशक से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। पहलाज निहलानी की अध्यक्षता वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) फिल्मों में मनमाने कट की सलाह देकर कई बार विवादों में घिर चुका है। इसी के चलते कई प्रख्यात फिल्मकारों ने फिल्मों को प्रमाणपत्र देने के तरीके में बदलाव करने की मांग की थी।

इसके बाद सरकार ने जानेमाने फिल्मकार श्याम बेनेगल की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। हालांकि उसकी सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है।

बेनेगल ने यू/ए की दो श्रेणियां बनाने की सिफारिश की है। इसमें एक 12 साल से अधिक उम्र और दूसरी श्रेणी 15 साल से अधिक उम्र के लिए है। इसी तरह वयस्क की भी दो श्रेणियां बनाने की सलाह दी थी। एक श्रेणी सामान्य और दूसरी अन्य वयस्क के लिए हो।

अक्टूबर 2003 से लेकर 2004 तक सेंसर बोर्ड के प्रमुख रहे 62 वर्षीय खेर ने कहा कि बेनेगल की सिफारिशों पर विचार किया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि देश में हमें स्वतंत्रता है। इन दिनों नकारात्मक चीजें बिकती हैं जबकि सकारात्मक चीजें खबर नहीं बनती हैं। सेंसर बोर्ड को पुनर्विचार करना चाहिए। उसकी नियम पुस्तिका 1952 में लिखी गई थी।

भाई-भतीजावाद पर नहीं बोले

अनुपम खेर ने कहा कि वह भाई-भतीजावाद से जुड़ी बहस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। ऐसा करने पर यह संदेश जाएगा कि वह करण जौहर या फिर कंगना रनोट का पक्ष ले रहे हैं। कंगना ने करण के चैट शो में उन्हें भाई-भतीजावाद का ध्वजवाहक करार दिया था। इसके बाद उनमें वाकयुद्ध शुरू हो गया था।

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