संपादकीय : बड़ी भूमिका को तैयारUpdated: Mon, 11 Sep 2017 10:45 PM (IST)

भारत-अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक में बनी सहमति से साफ है कि भारत अफगानिस्तान में बढ़ी हुई भूमिका निभाने को तैयार है।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी की भारत यात्रा पर इस बार खास निगाहें थीं। अमेरिका की नई अफगान नीति की घोषणा के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधे संवाद का यह पहला मौका था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नीति का एलान करते हुए भारत से अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाने की अपील की थी। साफ है कि अमेरिका अफगान मामलों से भारत को अलग रखने की पाकिस्तान की मंशा को ठुकरा चुका है। उल्टे ट्रंप प्रशासन की ओर से दो-टूक कहा गया कि पाकिस्तान स्थित दहशतगर्द गुट अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने में जुटे हुए हैं। अमेरिकी नीति में यह स्पष्ट परिवर्तन है। इससे भारत को अफगानिस्तान में अपने रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप पहल करने का नया अवसर मिला है।


इसी पृष्ठभूमि में रब्बानी भारत-अफगानिस्तान सामरिक भागीदारी परिषद की बैठक में हिस्सा लेने नई दिल्ली आए। इस बार परिषद की बैठक लगभग एक साल देर से हुई। मगर उल्लेखनीय यह है कि भारत के नजरिए से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल होते ही ये बैठक आयोजित हुई। इसके बाद जारी साझा वक्तव्य में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रब्बानी ने जोर दिया कि भारत व अफगानिस्तान के संबंध सिर्फ इन देशों के लिए ही नहीं, बल्कि इस पूरे इलाके के लिए अहम हैं। हालांकि साझा वक्तव्य में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन दोनों विदेश मंत्रियों ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान सीमापार से प्रायोजित आतंकवाद और (आतंकवादियों के) सुरक्षित अड्डों एवं शरणस्थली से उत्पन्न् खतरों का एकजुट होकर मुकाबला करेंगे। यह एक तरह से अफगानिस्तान की सुरक्षा रणनीति में भारतीय भूमिका की स्वीकृति है। इसके पहले वहां भारत का योगदान मोटे तौर विकास कार्यों में ही था। भारत वहां दो अरब डॉलर के निवेश सहायता कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत भारत ने वहां सड़क और अस्पताल बनाए हैं। पुलिस प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी भारत वहां चलाता है। इसके अलावा अफगानिस्तान के फौजी अफसरों को भारत स्थित सैन्य कॉलेजों में ट्रेनिंग दी जाती है। नई दिल्ली में सोमवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद सुषमा स्वराज ने एलान किया कि दोनों देश मिलकर सामाजिक, आर्थिक एवं बुनियादी ढांचा विकास की 116 नई परियोजनाओं पर काम करेंगे। ये परियोजनाएं 31 अफगानी प्रांतों के अंतर्गत खासकर कस्बाई व ग्रामीण इलाकों में चलाई जाएंगी।


नई दिल्ली में बनी सहमति को बेशक अमेरिका में भी सराहा जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने यही इच्छा जताई थी कि भारत अफगानिस्तान में अपनी भूमिका बढ़ाए। ट्रंप वहां अमेरिकी फौज की मौजूदगी बढ़ाने का एलान कर चुके हैं, यानी अफगानिस्तान एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। इस मौके पर सुरक्षा एवं विकास कार्यों में अपना दखल बढ़ाकर भारत वहां अपने रणनीतिक हित बेहतर ढंग से साध सकता है। सुषमा स्वराज की सलाहुद्दीन रब्बानी के साथ बनी अहम सहमतियों से इस मकसद का मार्ग और प्रशस्त हुआ है।

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