संपादकीय : साइबर हमले की दहशतUpdated: Tue, 16 May 2017 10:22 PM (IST)

साइबर हमले से साफ है कि दुनिया के विकसित देश भी सुरक्षित नहीं हैं। भारत जैसे देशों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

हाल ही में दुनिया के कई देशों में हुए साइबर हमले के पीछे किसका हाथ है, इस बारे में अभी अटकलें ही लगाई जा रही हैं। एक ताजा अनुमान में उत्तर कोरिया के हैकरों पर शक जताया गया है। मगर जांच एजेंसियों को किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी वक्त लगेगा। फिलहाल सूरत-ए-हाल यह है कि इस 'रैनसमवेयर के नाम से चर्चित हुए इस हमले ने दुनियाभर की कंप्यूटर प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर गहरी आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

पहले ऐसे हमले या तो शौकिया हैकर करते थे, या फिर किसी खास देश को वैचारिक या राष्ट्रवादी द्वेष की वजह से निशाना बनाया गया। लेकिन इस बार साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह ने 'वानाक्राई नामक मैलवेयर (ऐसा सॉफ्टवेयर जो कंप्यूटरों को अस्त-व्यस्त कर देता है) संचारित कर कंप्यूटर प्रणालियों को जाम किया। फिर उसे चालू करने के लिए फिरौती मांगी। इससे तकरीबन 150 देशों के तीन लाख कंप्यूटर सिस्टम प्रभावित हुए। इस कारण उन देशों के बैंकों, अस्पतालों, सरकारी एजेंसियों और कई प्राइवेट कंपनियों में कामकाज ठप हो गया। ये संस्थाएं एक तरह से बंधक बना ली गईं। उनके कंप्यूटर स्क्रीन पर ये लिखित संदेश आया कि 'ऊप्स, योर फाइल्स हैव बीन एनक्रिप्टेड। पीड़ित संस्थाओं से बिटकॉइन (ऑनलाइन मुद्रा) में 300 से 600 डॉलर तक की रकम का भुगतान करने की मांग की गई। कहा गया कि भुगतान तीन दिन में होना चाहिए, वरना राशि दोगुना कर दी जाएगी। सात दिन में रकम नहीं चुकाई गई, तो फाइलें उड़ा दी जाएंगी।

यूरोपीय संघ की पुलिस एजेंसी यूरोपूल ने कहा- 'ये हमला अभूतपूर्व है। दोषियों का पता लगाने हेतु एक जटिल अंतरराष्ट्रीय जांच की जरूरत होगी। यूरोपूल ने चेताया कि वायरस फैलाने वालों का मकसद पीड़ित कंपनियों से धन वसूलना और कुछ मामलों में उनकी बैंक संबंधी जानकारियां हासिल करना भी है।

इससे जाहिर है कि इस हमले के परिणाम कितने दूरगामी हैं। भारत में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस सिस्टम टीम (सीईआरटी-इन) ने जारी एक अलर्ट में विंडोज सिस्टम्स को फौरन अपडेट करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि इस हमले से आंध्र प्रदेश के पुलिस विभाग सहित कुछ अन्य स्थानों पर असर पड़ा, लेकिन भारत में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। परंतु उन्होंने आगाह किया है कि भारत ऐसे किसी साइबर हमले का निशाना बना, तो बड़ी मुसीबत खड़ी होगी।

वजह यह है कि यहां ज्यादातर सर्वर सुरक्षित नहीं हैं। स्पष्टत: इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। अमेरिका से लेकर फ्रांस तक के हालिया चुनावों में हैकरों के हस्तक्षेप की खबरों के बीच ताजा हमले ने दुनियाभर में साइबर सुरक्षा को कठघरे में ला खड़ा किया है। जब तमाम की तरह की सेवाएं कंप्यूटर आधारित हो रही हैं, तो ऐसे खतरों के नतीजों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। साफ है कि दुनिया के विकसित देश भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। इसके मद्देनजर भारत जैसे देशों में चिंता पैदा होना लाजिमी है।

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