संपादकीय : पाकिस्तान को पटखनीUpdated: Thu, 18 May 2017 10:43 PM (IST)

अंतरराष्ट्रीय अदालत के अंतरिम फैसले से साफ है कि भारत जिस उद्देश्य से उसके पास पहुंचा था, उसे पाने में फौरी तौर पर कामयाब है।

कुलभूषण जाधव के मामले में भारत को मिली बड़ी वैधानिक विजय ने देशवासियों को एक बार फिर सीना फुलाने का मौका दिया है। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने पाकिस्तान की दलील ठुकरा दी कि जाधव को सुनाए गए मृत्युदंड की वैधता पर सुनवाई का उसे हक नहीं है। कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया कि भारत और पाकिस्तान दोनों विएना संधि से बंधे हुए हैं। भारत की जाधव से राजनयिक संपर्क (कॉन्सुलर एक्सेस) की सुविधा की मांग वैध है। अब एक पाकिस्तानी सैन्य कोर्ट द्वारा जाधव को सुनाई गई सजा-ए-मौत की वैधता पर आईसीजे सुनवाई करेगा। जब तक ये सुनवाई पूरी नहीं होती, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जाधव को फांसी देने पर रोक लगा दी है।


स्पष्टत: भारत जिस उद्देश्य से आईसीजे गया, उसे पाने में वह फौरी तौर पर कामयाब रहा है। भारत की मुख्य दलील है कि पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायोग को जाधव से संपर्क करने का मौका ना देकर विएना संधि का उल्लंघन किया है। इस संधि में दूसरे देशों के बंदियों से व्यवहार के कायदे उल्लिखित हैं। पाकिस्तान की दलील थी कि एक-दूसरे के बंदियों के बारे में भारत और उसके बीच 2008 में द्विपक्षीय समझौता हुआ था। उसमें राजनयिक स्तर पर संपर्क का प्रावधान नहीं है। मगर यह उस समझौते की तकनीकी प्रस्तुति है। भारत का यह कहना तार्किक है कि समझौता करते वक्त यदि इस बात को लिखा नहीं गया, तो उसका कतई आशय नहीं था कि दोनों देश बंदियों से मानवीय व न्यायपूर्ण व्यवहार की शर्त हटाना चाहते थे।


तो क्या अब यह माना जाए कि जाधव की जिंदगी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है? अनेक जानकारों की राय है कि आईसीजे के ताजा फैसले के बावजूद इस बारे में आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता। समस्या यह है कि आईसीजे के फैसले का उल्लंघन करने वाले देश को दंडित करने का कोई अंतरराष्ट्रीय तंत्र मौजूद नहीं है। कम-से-कम तीन मामलों में अमेरिका ने उसके आदेशों की खुली अनदेखी की। लेकिन उसका कुछ नहीं बिगाड़ा जा सका।

आईसीजे के फैसलों पर अमल कराने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मानी जाती है। वहां किसी देश को वीटो का अधिकार हो, अथवा किसी अन्य देश की पीठ पर वीटो सक्षम देश का हाथ हो, तो फिर आईसीजे के फैसले का महज नैतिक महत्व रह जाता है। हाल में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को लगातार चीन का साथ मिला है। ऐसे में कहना कठिन है कि आईसीजे का ताजा आदेश कुलभूषण जाधव की जान बचाने के लिए काफी है। अनुभव यही है कि पाकिस्तान सभ्य अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के कायदों या मर्यादा को नहीं मानता। वह कह चुका है कि जाधव का मामला उसकी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है, जो आईसीजे के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसलिए भारत को उसके किसी अवांछित व्यवहार के लिए तैयार रहना चाहिए। आईसीजे के अंतिम फैसले के पहले ही पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस दिखाया, तो उसे कैसे माकूल जवाब दिया जाएगा, भारत को इसकी रणनीति तैयार रखनी चाहिए।

अटपटी-चटपटी

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