12 उम्मीदवार मैदान में, 10 हारे फिर भी 12 विजयीUpdated: Sun, 14 Sep 2014 11:16 PM (IST)

नईदुनिया ब्यूरो, नई दिल्ली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव किस हद तक

एबीवीपी का अनोखा गणितः स्कूल ऑफ साइंसेस में 10 उम्मीदवारों को विजयी होने के बाद बताया अपना

- एबीवीपी के इस दावे को लेकर कैम्पस के सभी संगठन हैरान

नईदुनिया ब्यूरो, नई दिल्ली

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव किस हद तक हावी था, इसका जीता जागता उदाहरण रविवार को आए जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के नतीजों के बाद देखने को मिला। संगठन ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने पर्चे में सेंट्रल पैनल के चार उम्मीदवारों के साथ 12 स्कूल काउंसलर्स के नाम प्रचारित किए थे, जिसमें से 10 को करारी हार का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके नतीजे घोषित होने पर एबीवीपी ने 12 स्कूल काउंसलर्स की जीत का दावा शुरू कर दिया। एबीवीपी के इस गणित को लेकर कैम्पस के सभी संगठन हैरान हैं और चूंकि छात्रसंघ से जुड़े कई गंभीर विषयों पर स्कूल काउंसलर्स की राय अहम होती है तो उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि जीत के बाद कथित रूप से एबीवीपी से जुड़े ये काउंसलर्स किस करवट बैठेंगे।

यहां बता दें कि एबीवीपी की ओर से जेएनयू छात्र संघ चुनाव में स्कूल ऑफ लैंग्वेज लिटरेचर एंड कल्चरल स्टडीज से कालू राम, निखिल, ओंकार श्रीवास्तव, सौरभ कीर्ति और शिवेक कुमार को चुनाव में उतारा गया था। इसी तरह स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से संगठन ने गौरव कुमार झा, जागूधन रत्नू, प्रियदर्शी, सुधीर कुमार और विजय कुमार को मौका दिया था। ये सभी उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं, जबकि एबीवीपी के सेंट्रल पैनल के साथ स्कूल काउंसलर्स के तौर पर प्रचारित किए जा रहे नामों में स्कूल ऑफ फिजीकल साइंसेस की अनुराधा राजपूत निर्विरोध जीती हैं और स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत स्टडीज से ओम प्रकाश ने जीत दर्ज की है। साफ है कि प्रचार अभियान में एबीवीपी की ओर से प्रचारित किए जा रहे स्कूल काउंसलर्स के 12 उम्मीदवारों में से 2 को सफलता मिली, जबकि 10 हारे, लेकिन नतीजे जारी होने पर संगठन ने विजयी उम्मीदवारों के तौर पर 12 काउंसलर्स के नाम जारी कर दिए।

संगठन का तर्क, जो गले नहीं उतरता

संगठन के प्रदेश मंत्री साकेत बहुगुणा के अनुसार जेएनयू के साइंस स्कूल्स में एबीवीपी का एकछत्र राज है और यही कारण है कि हम अपने प्रचार अभियान में यहां से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के नामों का प्रचार नहीं करते हैं। साइंस स्कूल्स के लिए अलग से प्रचार सामग्री तैयार होती है और उसे स्कूल स्तर पर प्रचारित किया जाता है। संगठन की ओर से स्कूल ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी से विजयी अभिषेक कुमार पांडे को समर्थन दिया गया था और शेष सभी 9 साइंस स्कूल के विजयी उम्मीदवारों के साथ संगठन कुल 21 पदों पर चुनाव लड़ रहा था।

दावों पर उठते सवाल

लेकिन, संगठन के प्रदेश मंत्री साकेत बहुगुणा के दावे की पोल खोलने के लिए इतना प्रमाण ही काफी है कि जब एबीवीपी एक निविरोध जीतने वाली स्कूल ऑफ फिजीकल साइंसेस की अनुराधा राजपूत को प्रचार अभियान का हिस्सा बना रही थी तो इन उम्मीदवारों को क्यों नहीं।

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