भारत लौटे मुस्लिम मौलवी, पाक में समझ लिया था रॉ के जासूसUpdated: Mon, 20 Mar 2017 11:12 AM (IST)

पिछले दिनों पाकिस्तान में संदिग्ध रूप से लापता हुए भारत के दो मौलवी सुरक्षित भारत लौट आए हैं।

नई दिल्ली। पाकिस्तान में कई दिनों तक गुम रहे हजरत निजामुद्दीन दरगाह के प्रमुख मौलवी सज्जादानशीं सैयद आसिफ निजामी और उनके भतीजे वरिष्ठ सूफी मौलवी नाजिम अली निजामी सोमवार को दिल्ली लौट आए। उनकी रहस्यमय गुमशुदगी का राज अभी सामने नहीं आया है।

दोनों ने यहां पहुंच कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की, लेकिन भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उन पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- "वे सहानुभूति पाने को झूठ बोल रहे हैं। हमारे पास स्वतंत्र सूचना है कि वे दोनों देश के खिलाफ काम कर रहे थे।"

वैसे तो दोनों मौलवियों ने पाकिस्तान में अपने साथ घटित घटनाओं के बारे में फिलहाल कुछ ज्यादा नहीं बताया है। परंतु आसिफ निजामी के बेटे साजिद निजामी ने आरोप लगाया कि कराची के एक उर्दू अखबार ने दोनों को भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) से संबद्ध बताया था, जिसके आधार पर उन्हें "पकड़ लिया गया।"

नाजिम अली निजामी ने पाकिस्तानी मीडिया की उस रिपोर्ट को खारिज कर किया है कि "वे सिंध के अंदरूनी इलाके में थे, जहां कोई संचार नेटवर्क नहीं था।" उन्होंने कहा- "हमारे पास सिंध के अंदरूनी इलाके का वीसा ही नहीं था तो हम वहां कैसे पहुंच जाते?"

यह पूछे जाने पर कि उनसे पूछताछ क्यों हुई तो नाजिम ने कहा कि उनसे वीसा और इमिग्रेशन से जुड़े विवरणों के बारे में पूछा गया।शांति का संदेश लेकर गए थेसुषमा से मुलाकात के बाद नाजिम अली निजामी ने सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार खासकर विदेश मंत्री को धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा- "हम गलत काम करने वालों में से नहीं हैं। हम मुहब्बत और शांति का पैगाम लेकर पाकिस्तान गए थे। कुछ लोगों को हमारा पैगाम पसंद नहीं आया होगा। हम फिर से बड़े संकल्प के साथ पाकिस्तान जाएंगे।" निजामी ने स्वदेश वापसी में पाकिस्तानी सरकार के सहयोग के लिए उसे भी धन्यवाद दिया।

बताते हैं कि पाकिस्तानी अखबार "उम्मत" ने अपनी एक रिपोर्ट में दोनों मौलवियों के "रॉ" तथा मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के लिए काम करने का दावा किया था।

ये दोनों 8 मार्च को लाहौर गए थे लेकिन गत सप्ताह के मध्य से गुम थे। इसके बाद भारत ने इस मसले को पाकिस्तान के साथ उठाया था। आसिफ की यात्रा का मुख्य मकसद कराची में अपनी 90 वर्षीय बहन से मिलना था।

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