मेरा बेटा परीक्षा देने गया है साहब, परीक्षा के बाद घर से निकाल देनाUpdated: Sat, 18 Mar 2017 12:16 AM (IST)

प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ जा धमकी और लोगों के घरों से सामान निकालकर उन्हें खदेड़ने लगी।

राजनांदगांव। बल्देव बाग में मंगल भवन के पास झोपड़पट्टी वाला एरिया। प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ जा धमकी और लोगों के घरों से सामान निकालकर उन्हें खदेड़ने लगी। साथ में जेसीबी और अन्य वाहन भी थे जिससे मकानों को तोड़ा जा रहा था। साथ ही साथ सामानों को वाहनों में लोड भी कर रहे थे। सपनों का आशियाना छीने जाने से वहां रह रहे लोग सहमे हुए थे। किसी घर में बुजुर्ग भर थे तो किसी में महिलाएं और बच्चे ही थे। प्रशासनिक सख्ती के बीच बसंती वर्मा नाम की महिला अफसरों से गुहार लगाती रहीं कि उसका बेटा परीक्षा देने गया है। परीक्षा खत्म हो जाने दीजिए साहब। फिर वह खुद मकान खाली कर देंगी। नहीं तो आप लोग आकर निकाल देना।

रामा सोनकर अपनी बहू सीमा के साथ गिड़गिड़ा रहीं थी कि अभी कुछ दिन पहले ही तो उन्होंने नगर निगम में टैक्स भरा है। फिर ऐसा अन्याय क्यों कर रहे हैं? इसी तरह की कई मिन्नतों की अनसुनी कर प्रशासनिक दस्ते ने वहां के करीब 124 मकानों को खाली कराने अंतिम बार हफ्तेभर का समय दिया है।

ओवरब्रिज के नीचे और आसपास बसी झोपड़पट्टी काफी हद तक पक्के मकानों में तब्दील हो चुकी है। पिछले दो माह से नगर निगम वहां कब्जा खाली कराने की जद्दोजहद कर रहा है। नोटिस और चेतावनी के बीच कुछ लोगों को पेंड्री में बने 1072 आवासों में शिफ्ट भी किया जा चुका है। लेकिन बाकी लोग तंग आवास और असुविधाओं के बीच बसायी गई सरकारी कालोनी में जाने के पक्ष में नहीं है। शुक्रवार सुबह अचानक प्रशासनिक टीम फिर वहां धमक गई।

तहसीलदार प्रेमलता चंदेल, एएसपी शशिमोहन सिंह, सीएसपी सचिनदेव शुक्ला और तीन टीआई समेत भारी बल भी तैनात था। जैसे ही तोड़ू दस्ता को देखा, लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इसी बीच वार्ड के पार्षद विनय झा और दीपक यादव भी वहां पहुंच गए और लोगों के साथ खड़े हो गए। उनका भी कहना था कि बच्चों की परीक्षा चल रही है। तब तक का समय दिया जाए, लेकिन अफसरों ने यह कहकर बात मानने से इंकार कर दिया कि तीन माह से मकान खाली करने कहा जा रहा है। अब तक क्या कर रहे थे?

अकेले जूझती रही महिला

जिस समय तोड़ू दस्ता कार्रवाई कर रहा था, बसंती वर्मा घर पर अकेली थी। पति काम पर चला गया था। दोनों बेटे परीक्षा दिलाने गए थे। घर को बचाने वह अकेले जूझती रही। महिला पुलिस ने उसे जकड़ लिया। फिर दस्ते ने घर का सामान बाहर फेंक दिया।

यही दिन बाकी रह गया था

करीब 70 साल की बिदन बाई का भी मकान तोड़ा जाना है। प्रशासनिक सख्ती के दौरान वह बेबस घर के बाहर बैठीं रहीं। उनका कहना था कि इस उम्र में अब वे कहां जाएं। उनके परिवार में और कोई है भी नहीं। क्या इस बुढापे में यही दिन देखना बाकी रह गया था। उन्होंने कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी भी जताई।

पार्षदों ने किया विरोध तो जेल

लोगों के साथ तोड़फोड़ का विरोध कर रहे पार्षद विनय झा ने अपने साथी पार्षद दीपक के साथ प्रदर्शन किया। अफसरों ने समझाया, लेकिन वे नारेबाजी करने लगे। तभी पुलिस वालों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शाम को मुचलके पर दोनों पार्षद रिहा किए गए। विनय ने बताया कि मोहलत को लेकर उन्होंने प्रभावित लोगों के साथ मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, महापौर मधुसूदन यादव समेत अन्य जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अफसरों से मुलाकात की थी, लेकिन कोई राहत नहीं दिला पाया।

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