भोरमदेव में पहली बार कैमरे में दिखे तीन बाघUpdated: Mon, 01 Aug 2016 07:28 AM (IST)

भोरमदेव अभयारण्य में पहली बार की गई साइंटिफिक कैमरा ट्रेपिंग में बड़ी सफलता हाथ लगी है।

रायपुर। भोरमदेव अभयारण्य में पहली बार की गई साइंटिफिक कैमरा ट्रेपिंग में बड़ी सफलता हाथ लगी है। कैमरों में 3 बाघ दिखे हैं, जिनके 6 पिक्चर (स्नेप) कैमरों ने कैद की है। 'नईदुनिया' को जानकारी देते हुए अभयारण्य के डीएफओ आलोक तिवारी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पहले रिपोर्ट कंप्लाइल कर वाइल्ड वर्ल्ड इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूआई) को भेजी जाएगी, उसके बाद पिक्चर भी सार्वजनिक करेंगे। इससे पहले पग मार्क में केवल एक बाघ का ही निशान मिलता रहा है।

जून में अभयारण्य में 3 बाघों की मौजूदगी के सबूत मिलने के बाद उनके मूवमेंट को कैद करने के लिए नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी रायपुर को वन विभाग ने ट्रैपिंग का वर्क-ऑर्डर दिया था। अप्रैल से जून तक 40 हाई क्वालिटी रेंज कैमरे लगाए गए थे। 2 जुलाई को सभी कैमरे निकाल लिए गए, इनकी जांच में 28, 29 जून से लेकर 2 जुलाई तक की तारीख में बाघों के मूवमेंट कैमरे में कैद हुए हैं।

हालांकि वन विभाग इस कॉरिडॉर में 4 बाघों के होने का दावा कर रहा है। बता दें कि बाघों की 'फोर्थ फेज मॉनिटरिंग' जारी है, जिसके तहत भोरमदेव अभयारण्य को 250 से ज्यादा ग्रीड पॉइंट में बांटकर एनालिसिस किया गया है।

352 वर्ग किमी के क्षेत्र में दर्ज है मौजूदगी

नोवा सोसाइटी के सचिव मोइज अहमद ने बताया कि भोरमदेव में 352 वर्ग किमी के क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी है। कान्हा नेशनल पार्क से लगा यह अभयारण्य 'कान्हा अचानकमार टाइगर कॉरिडॉर' में आता है। यहां जारी सर्वे के दौरान बाघ का मल मिला था। उन्होंने बताया कि यहीं 20 मीटर की दूरी से जून में उनका सामना बाघ से हुआ था।

इसके पहले रेंडमली हुई थी ट्रेपिंग

वन विभाग को साल 2014 में पहली बार भोरमदेव अभयारण्य में बाघ की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। स्थानीय लोगों ने उनके जानवरों पर हुए हमले की जानकारी दी थी। इसके बाद रेडमली कैमरे लगाए गए थे। साल 2014, 2015 में लगाए गए कैमरों ने बाघ की तस्वीरें ली थीं। डीएफओ तिवारी का कहना है कि डब्ल्यूडब्ल्यूआई साइंटिफिक ट्रेपिंग को ही मान्य करती है, इसलिए यह करवाई गई है।

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