नाटक 'मुआवजे' सामाजिक विसंगति पर करारा प्रहारUpdated: Sat, 05 Sep 2015 10:33 PM (IST)

प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर द्वारा शताब्दी स्मरण श्रृंखला शनिवार को वृंदावन हॉल में आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ कलाकार व उपन्यासकार तेजिंदर का व्याख्यान और भीष्म साहनी के नाटक

रायपुर। प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर द्वारा शताब्दी स्मरण श्रृंखला शनिवार को वृंदावन हॉल में आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ कलाकार व उपन्यासकार तेजिंदर का व्याख्यान और भीष्म साहनी के नाटक 'मुआवजे' का मंचन किया गया। विभाजन की त्रासदी पर भीष्म साहनी ने अविस्मरणीय कृतियों का सृजन किया। नाटक मुआवजे वर्तमान भारतीय समाज की असामाजिकता पर करारा व्यंग्य है। नाटक के जरिए आज की बदलती हुई मूल व्यवस्था पर सार्थक टिप्पणी की गई है। नगर में सम्प्रदायिक दंगे भड़कने जैसी एक-दो छोटी-मोटी घटनाएं हो चुकी हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति का सामना पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनता और व्यापारी वर्ग किस प्रकार करता है, इसको लेकर इस नाटक का तानाबाना बुना गया है।

तेजिंदर ने अपने व्यक्तव्य में भीष्म साहनी कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे उनसे पहली बार विशाखापट्टनम में मिले थे। उनकी सादगी एवं सरल व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने उनकी -चीफ की दावत, अमृतसर आ गया एवं 1984 के सिख के दंगों पर लिखी गई कहानियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रगतिशील लेखक संघ के सचिव जीवेश चौबे ने बताया कि इस वर्ष प्रगतिशील आन्दोलन से जुड़ी हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकारों की जन्म शताब्दी है। प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर द्वारा इनकी स्मृति में शताब्दी स्मरण श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है।

इस आयोजन में मुख्य वक्ता वरिष्ठ कथाकार एवं उपन्यासकार तेजिंदर रहे। कार्यक्रम का संचालन जीवेश चौबे तथा आभार प्रदर्शन संजय शाम ने किया। इस कार्यक्रम में नगर के अनेक बुद्धिजीवी, रचनाकार, रंगकर्मी मौजूद थे।

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