पति-पत्नी के बीच इच्छाधारी नाग का प्रतीक- 'नागमंडल'Updated: Mon, 31 Aug 2015 12:54 AM (IST)

पति को घर के आसपास नाग दिखाई देता है। इसे पत्नी सहजता से लेती है। वहीं इच्छाधारी नाग अर्पणा के रूप में आने से पत्नी उसे ही पति समझती रही और फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब पत्नी ने

रायपुर। पति को घर के आसपास नाग दिखाई देता है। इसे पत्नी सहजता से लेती है। वहीं इच्छाधारी नाग अर्पणा के रूप में आने से पत्नी उसे ही पति समझती रही और फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब पत्नी ने पति से गर्भवती होने की सच्चाई बयां की, फिर क्या था? नारी के शोषण और समाज की पंचायत का सामना करने की मजबूरी कथानक से जुड़ती गई। इससे जुड़ी नारी वेदना को मुक्ताकाश मंच पर अग्रगामी हिन्दी नाट्य समिति के पात्रों ने 'नागमंडल' में जीवंत किया।

संस्कृति विभाग के सहयोग से नागमंडल के लेखक गिरीश कर्नाड की कालजयी कृति का शानदार निर्देशन जलील रिजवी ने करते हुए समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद लुनावत के साथ मिलकर नागमंडल को सराहनीय बनाया। इसे प्रमुख पात्र के रूप में शेखर शुक्ला (पति) प्रमिला रात्रे ने (पत्नी) के रूप में नाट्य मंचन को सार्थक रूप देने का सुन्दर प्रयास किया। कहानी के अगले पायदान पर जब पति को पता चलता है कि पत्नी गर्भवती है तो वह खुश होने के बजाय पंचायत बुलाने पर उतारू हो जाता है, क्योंकि उसे इसका एहसास होता है कि पत्नी के गर्भ में उसका बच्चा नहीं। पंचायत के सामने पत्नी (रानी) नाग के प्रतिक को लेकर कसम खाती है कि उसने पति और नाग देवता के अलावा जीवन में किसी को नहीं जाना, तब पंचायत ने उसे देवी स्वीकारा और अर्पणा को सेवा करने कहकर चले गए। इधर रानी को दी जा रही यातना को सुनकर गांव से लापता कपर्णा की अंधी मां विलखती हुई आती है, जो एक तरफ बेटे के वियोग में बिलखती है तो दूसरी तरफ रानी का पति उसके गर्भ में पलते बच्चे को अपना स्वीकार करने में विश्वास नहीं कर पाता। नाट्य मंचन को देखने के लिए वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर, फिल्म अभिनेता अनुज शर्मा सहित दर्शकों ने देखकर सराहा।

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