कला की साधना में कभी पूर्ण विराम नहीं : शेखर सेनUpdated: Mon, 26 Jan 2015 01:34 AM (IST)

रंगकर्मी, संगीतकार, गायक, अभिनेता यह सब कुछ एक ही व्यक्ति पहचान है। वे हैं शेखर सेन, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है।

रायपुर। रंगकर्मी, संगीतकार, गायक, अभिनेता यह सब कुछ एक ही व्यक्ति पहचान है। वे हैं शेखर सेन, जिन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुरस्कार मिलने के बाद 'नईदुनिया' को उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा- 'कला की साधना में कभी पूर्ण विराम नहीं होता है।'

रायपुर में जन्मे शेखर सेन का नाम पद्म पुरस्कार के लिए महाराष्ट्र सरकार की तरफ से भारत सरकार को भेजा गया था। बंगाली परिवार में जन्मे शेखर सेन को संगीत विरासत में मिला। पिता डॉ. अरुण कुमार सेन इंदिरा गांधी कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कुलपति थे और माता डॉ. अनिता सेन ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध शास्त्री गायिका।

शेखर सेन ने कहा कि जैसे ही उन्हें पता चला कि उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा हुई, सबसे पहले मैंने अपने उन सभी साथियों को मन से याद किया, जिनका कहीं न कहीं मेरे जीवन में योगदान रहा। माता-पिता, भाई और सभी।

उन्होंने यह जोर देते हुए कहा कि रायपुर से ही उन्हें संस्कार मिले, छत्तीसगढ़ की माटी में जरूर कुछ बात है। उनसे पूछा गया कि छत्तीसगढ़ में कलाकार हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल सकी? उन्होंने जवाब में कहा कि छोटे स्थानों के कलाकारों को पहचान बनाने में वक्त लगता है, लेकिन अब रायपुर छोटा शहर नहीं रहा।

एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कला की जिंदगी में हर पॉइंट टर्निंग पॉइंट होता है। यह पूछने पर कि क्या पद्मश्री मिलने में लंबा वक्तलग गया, वे बोले- जब मिले, तभी सही है। रायपुर और छत्तीसगढ़ के लिए और क्या करना चाहेंगे तो कहने लगे कि हर साल प्रस्तुति देता हूं। शेखर सेन की पहचान तुलसी, कबीर, विवेकानंद और साहेब जैसे एकल पात्र वाली प्रस्तुतियों से भी है।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.