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दिव्यांगों के लिए नया कानून जल्द, सामान्य स्कूलों में होंगे विशेष शिक्षकUpdated: Thu, 12 Oct 2017 07:19 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगों की मदद के लिए नियम बदल दिए हैं।

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगों की मदद के लिए नियम बदल दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह प्रदेश के दिव्यांगों की जिंदगी बदलने में जुटे हैं। असल में हम सब दिव्यांग हैं। सभी को जिंदगी में किसी न किसी की मदद की जरूरत होती है। सोच बदलने की आवश्कता है।

यह बात हैलो नईदुनिया कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश के समाज कल्याण, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव सोनमणि बोरा ने जनता के सवालों के जवाब में कहीं। कार्यक्रम गुरूवार दोपहर 2 से 3 बजे तक रखा गया था। बोरा ने कहा कि 2019 में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ तैयार है। उन्होंने बड़ी बेबाकी से सभी के सवालों के जवाब दिए। प्रस्तुत है जनता के प्रमुख सवाल और उनके जवाब।

सवाल- समाज कल्याण विभाग में जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं उन्हें ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा रही। मठपुरैना में विभाग से 10 लाख देने के बाद भी एटीएम नहीं लगा। सामाजिक पेंशन का लाभ भी नहीं मिल रहा?- नरेंद्र साहू, रायपुर

जवाब- आप आकर मुझसे मिलें। आपकी शिकायतों पर जो संभव होगा करेंगे।

सवाल- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में दो-तीन बार फार्म भरा लेकिन लोन नहीं मिला। मेरे पास घर पर खेत नहीं। क्या करूं?-दिनेश साहू, बेमेतरा।

जवाब- यह योजना मेरे विभाग से संबंति नहीं है। आप अपने जिले के कलेक्टर से मिलें।

सवाल-व्यापमं के माध्यम से एडीओ की परीक्षा होने वाली है। परीक्षा के 15 दिन पहले कहा जा रहा है कि जिनके पास पंचायत एवं ग्रामीण विकास की डिग्री होगी उन्हें बोनस में 15 अंक दिए जाएंगे। ऐसे में हमारी तैयारी का क्या होगा?- प्रकाश, बिलासपुर।

जवाब- व्यापमं की परीक्षा मेरे नियंत्रण में नहीं है। आप अपनी शिकायत वेबसाइट में दर्ज कराएं। मैं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों के संज्ञान में जरूर आपकी समस्या लाऊंगा।

सवाल- मैं वसुंधरा सामाजिक संस्थान से हूं। अंधविश्वास हमारे प्रदेश की बड़ी समस्या है। इस पर सरकार क्या कर रही है?- सुनील साहू, कसडोल।

जवाब- हर समाज में अलग तरह का अंविश्वास होता है। अंधविश्वास से मुक्ति किसी एक विभाग के बस की बात नहीं है। कई संगठन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि लोगों की सोच बदली जाए। शिक्षा बड़ा हथियार है। लोग शिक्षित होंगे तो खुद ही अंधविश्वास दूर हो जाएगा। जनजागरण में लगे कला जत्था को इस पर भी जागरूकता लाने को कहूंगा।

सवाल- हमारे इलाकों की पंचायतों में शौचालय बने हैं पर पैसा नहीं मिल रहा। - अमित राम साहू, कोटा।

जवाब- ओडीएफ मेरे विभाग का काम नहीं है। मैं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से बात करता हूं।

सवाल- हमारा गांव दूरस्थ नक्सल इलाके में है। यहां रोजगार नहीं है। युवाओं को जागरूक करने के लिए योजनाओं का प्रचार प्रसार क्यों नहीं किया जाता?- यशवंत बघेल, मानपुर।

जवाब-सरकार ने युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई हैं। जो युवा उच्च शिक्षा में नहीं जा रहे उन्हें कौशल उन्न्यन का अधिकार है। आप जिला प्रशासन से बात करें। मैं कलेक्टर से बोलूंगा कि प्रचार प्रसार के लिए आपके इलाके में कैंप लगाएं।

सवाल- हमारे यहां खेल प्रशिक्षण संस्थान की जरूरत है। क्या यहां र्स्पोट्स कांप्लेक्स बनेगा?- केशव साहू, बनारी, जांजगीर चांपा।

जवाब- आपके यहां जिला खेल परिसर है। फिर भी आप चाहें तो खेल परिसर में इंडोर स्टेडियम का काम करा देता हूं।

सवाल-मैं एक पेंशनधारी हूं। मेरी पेंशन 1420 रूपए है जबकि स्टेट बैंक में मिनिमम बैलेंस 3 हजार रखने का नियम है। इस वजह से हर महीने मेरी पेंशन में से राशि काट ली जाती है। क्या करूं?- जगनाथ सिंह, रायपुर।

जवाब- यह मेरे विभाग का विषय नहीं है फिर भी आपकी बात मैं एसबीआई के अफसरों के सामने रखूंगा।

सवाल- समाज कल्याण विभाग में विशेष शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं हो रही?- भगवान सिंह ध्रुव, गरियाबंद।

जवाब- सीी भर्ती तो अभी नहीं होगी लेकिन बैकलॉग के पदों पर जल्द नियुक्तियां होंगी। बैकलॉग के जो आवेदन आए हैं उनकी मेरिट लिस्ट बन चुकी है। जल्द दावा आपत्ति मंगाएंगे, फिर एक महीने में नियुक्ति दे दी जाएगी।

सवाल- मैं समाज कल्याण विभाग के डुमरतरई हास्टल में काम करती हूं। दीवाली के समय हमारा वेतन नहीं आया। हमारी तनख्वाह कब बढ़ेगी?-यमुना बाघ, रायपुर।

जवाब- मैं दिखवाता हूं। आप सब्र रखें।

सवाल- मैं नेटबाल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हूं। हमारे यहां कोच की भर्ती नहीं हो रही। और क्या हम अपने प्रदेश में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी नहीं ले सकते?-एश्वर्या पाठक, जांजगीर

जवाब- 2018 में तो मेजबानी गोवा के पास है। हम 2019 के राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने की तैयारी कर रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने गवर्निंग बाडी की बैठक ली थी। राजनांदगांव, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और रायपुर में आयोजन करने की तैयारी है। जरूरी हुआ तो कुछ खेल रायगढ़, कोरबा और दूसरे शहरों में भी करा सकते हैं। नेटबाल ग्राउंड के लिए 22 लाख रूपए दिए हैं। लोनिवि इसका निर्माण कराएगा। अभी विभिन्न् खेलों के 15 कोच भर्ती करने जा रहे हैं।

सवाल- गोल बाजार में बिजली पानी की समस्या कब सुलझेगी?- कन्हैयालाल सचदेव, रायपुर।

जवाब- दिखवाता हूं।

सवाल- हमारे क्षेत्र में रोजगार नहीं है। इससे पलायन की बड़ी समस्या है। क्या कोई हल निकलेगा?- द्वारिका प्रसाद निर्मलकर, कसडोल।

जवाब- आजीविका मिशन, कौशल उन्न्यन आदि योजनाओं का लाभ उठाएं। यह आपका अधिकार है। जो संस्था कौशल उन्न्यन की ट्रेनिंग देती है उसे काम भी दिलाना होता है। आप कलेक्टर से मिलें।

सवाल- मेरी दादी गोमाबाई के नाम से जमीन है जिसका बंटवारा प्रतिवेदन एक साल से लंबित है। तहसीलदार नांदघाट के पास केस है। क्या आप हमारी मदद करेंगे? - विनय सिंह ठाकुर, मारो।

जवाब- मेरे से संबंधित मामला नहीं है। आप कलेक्टर से शिकायत क्यों नहीं करते। मैं आपके कलेक्टर से कह दूंगा कि मामला देखें।

सवाल- हमने विशेष शिक्षक की ट्रेनिंग ली है। कई साल से पढ़ा रहे हैं लेकिन विभाग में भर्ती नहीं हो रही। लगता है हमारी तो नौकरी की उम्र ही निकल जाएगी। हमारा भविष्य क्या है?- टीकम सिंह ध्रुव, छुरा, योगेश चौहान जांजगीर, चंद्रकिरण दुबे, दुर्ग।

जवाब- केंद्र सरकार ने नियम बदल दिया है। अब सामान्य स्कूलों में ही दिव्यांग बच्चों की भी पढ़ाई होगी। सभी स्कूलों को इस लायक बनाना है कि दिव्यांग उसमें पढ़ सकें। इसके लिए हमें विशेष शिक्षकों की जरूरत होगी। पूरे देश में विशेष शिक्षकों की बेहद कमी है। विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। कुछ एनजीओ प्रशिक्षण देते हैं, उन्हें प्रशिक्षण देने और अधिक विशेष शिक्षक तैयार करने लिखा है। नए एनजीओ भी बनाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने दिव्यांगों के लिए नया एक्ट बनाया है। नियम भी बन चुका है। नियम लागू होंगे तो विशेष शिक्षकों की कमी हो जाएगी। हर स्कूल में एक विशेष शिक्षक की जरूरत होगी। शिक्षा विभाग में ज्यादा से ज्यादा विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। विशेष शिक्षक मिल नहीं रहे इसलिए उम्र की दिक्कत शायद ही आएगी।

सवाल- हमारे ब्लॉक की कोरापुरी पंचायत में पीडीएस का चावल नहीं पहुंचा है।- दिनेश जायसवाल, तखतपुर।

जवाब- दिखवाता हूं।

सवाल- मुख्यमंत्री तीर्थ योजना में बुजुर्गों के सहयोगी के रूप में जाने वाले क्या एक से ज्यादा बार अलग-अलग बुजुर्गों के साथ जा सकते हैं? पिछली बार शिरडी गए थे तो वहां ऐसे होटल में रूकवाया गया था जिसमें पश्चिमी सभ्यता के टायलेट थे। - वेद प्रकाश नायक, कोरबा।

जवाब- हमारी कोशिश है कि एक एक तीर्थ यात्री कम से कम एक यात्रा कर पाए। सहयोगी के लिए क्या नियम हैं इस तथ्य की ओर पहली बार आपने ध्यान दिलाया है। हम कोशिश करेंगे कि रूकने की जगह हमारे प्रदेश के तीर्थ यात्रियों के लिए सुविाजनक हो।

सवाल-क्या पंचायतों में खेल के लिए कर्मचारी नियुक्त करने की कोई योजना है?-उमेश कुमार साहू, बेमेतरा।

जवाब- मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है।

सवाल- 2011 की सर्वे सूची में मेरा नाम नहीं है। क्या करूं?- गंगाराम बंजारे, पाटन।

जवाब- आप जिला प्रशासन से संपर्क करें।

सवाल- मेरे माता पिता मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत तीर्थ यात्रा करना चाहते हैं। हम बीपीएल श्रेणी में नहीं हैं। क्या योजना का लाभ मिल सकता है?- गिरीश नंद साहू, ग्राम पुरूवारा, कोटा।

जवाब- अगली बार यात्रा होगी तो आवेदन दें। मैं कोशिश करूंगा।

सवाल- मानसिक दिव्यांग बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है। क्या करूं? - राकेश सिंह ठाकुर, रायपुर।

जवाब- मेरे विभाग के अफसर आपसे मिलेंगे और आपकी समस्या सुलझाएंगे।

सवाल- मुर्गी पालन योजना में कितना अनुदान मिलता है। क्या मुझे इस काम के लिए लोन मिल सकता है?- दिनेश कुमार देवांगन, जांजगीर।

जवाब- यह पशुपालन विभाग से संबंधित मामला है। आप उनसे मिलें। बैंक लोन के लिए आवेदन दे दें। मैं आपके जिले के जिला पंचायत सीईओ से कहूंगा कि आपकी मदद करें।

सवाल- मेरा बच्चा श्रवण बाधित है। दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की क्या व्यवस्था है?-जयेश कुमार सिन्हा, राजनांदगांव।

जवाब- दिव्यांगों की शिक्षा पर बहुत काम हो रहा है। सामान्य स्कूल में भी आप पढ़ा सकते हैं। अगर अभी सामान्य स्कूल में विशेष शिक्षक नहीं हैं तो रायपुर या बिलासपुर में हमारे विशेष स्कूल में भेज दें। हम हास्टल में रखकर मुफ्त शिक्षा दिलवाएंगे।

सवाल- युवाओं के लिए आपके विभाग में क्या योजना है?- जामू नाग, दंतेवाड़ा।

जवाब- आप लोन लेकर स्वरोजगार कर सकते हैं। प्रानमंत्री मुद्रा योजना में आसानी से सस्ता लोन उपलब् है। कौशल उन्न्यन और अन्य प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है। आप कलेक्टर से मिलें।

नईदुनिया का सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगों, तृतीय लिंग के लोगों के लिए तमाम योजनाएं शुरू की हैं। इसके बावजूद आज भी कई दिव्यांग सड़क पर भीख मांगते दिखते हैं। ऐसा क्यो?

जवाब- प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता में दिव्यांगों का उत्थान है। उन्होंने 1995 का एक्ट बदल दिया है। अप्रैल 2017 से नया एक्ट लागू हो चुका है। पहले सिर्फ 7 प्रकार के दिव्यांग थे। अब 21 प्रकार के हो गए हैं। इसमें सिकलसेल, थैलेसेमिया प्रभावित, एसिड विक्टिम आदि श्रेणी भी शामिल की गई है। हमारे प्रदेश में दिव्यांगों, परित्यक्ता और विवा महिलाओं समेत कई श्रेणियों में पेंशन की व्यवस्था है। सभी के अकाउंट खोले गए हैं जिन्हें अब आार लिंक किया जा रहा। क्षितिज अपार संभावनाएं, छात्रगृह योजना आदि चल रही। स्थिति बदल रही है।

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