छत्तीसगढ़ में थिएटर के साथ छालीवुड को संवारने की जरुरतUpdated: Sun, 17 Apr 2016 04:01 AM (IST)

थिएटर से करियर शुरू करने के बाद बॉलीवुड में एन्ट्री करके शोहरत बटोरने वाले फिल्म एक्टर एवं डायरेक्टर मकरंद देशपाण्डे शनिवार को रायपुर पहुंचे। उन्होंने संस्कृति विभाग में जारी

रायपुर। थिएटर से करियर शुरू करने के बाद बॉलीवुड में एन्ट्री करके शोहरत बटोरने वाले फिल्म एक्टर एवं डायरेक्टर मकरंद देशपाण्डे शनिवार को रायपुर पहुंचे। उन्होंने संस्कृति विभाग में जारी राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रेसवार्ता के दौरान फिल्म डायरेक्टर पीयूष मिश्रा की मौजूदगी में कहा कि कलाकार को उसके काम से पहचान मिलती है। अगर मुझे भी छालीवुड में काम करने का मौका मिला तो इंकार नहीं करूंगा। छत्तीसगढ़ में थिएटर के साथ छालीवुड को संवारने का प्रयास होना चाहिए। इसकी जरुरत थिएटर ही नहीं छालीवुड कलाकार भी महसूस कर रहे होंगे।

फिल्म एक्टर देशपाण्डे ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने फिल्म निमार्ताओं ही नहीं थिएटर कलाकारों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इसका फायदा कलाकारों को मिल रहा है। वहां थिएटर में सफल होने वाले ही नहीं असफल एक्टर को भी फिल्मों में काम मिलता है। कुछ कलाकारों तो थिएटर के साथ मराठी फिल्मों और बॉलीवुड तीनों ही लेबल पर खुद को साबित कर रहे हैं।अगर फिल्म निर्माता मूवी बनाता है, तो सरकार भी सब्सिडी देती है। इससे एक तरह का सपोर्ट मिलता है। इस तरह का प्रयास छत्तीसगढ़ में होना चाहिए।

स्थानीय निर्माता भी जो मूवी बनाए उसमें अंचल की संस्कृति का समावेश करें, इससे लोकल दर्शक उन्हें आसानी से मिलेंगे। महाराष्ट्र में बनाई जाने वाली मराठी फिल्मों में वहां का कल्चर सबसे अहम होता है। इससे दर्शक सिनेमा देखने उत्साह से पहुंचते हैं। देशपाण्डे ने बताया कि अगर फिल्म निर्माण में मेहनत की जाती है, तो सरकार को भी कलाकारों को काम देने और उन्हें आर्थिक तंगी से बचाने का प्रयास करना होगा॥ ऐसा नहीं होने की सूरत में ही कलाकार परिवार की खुशी के लिए शौक को पीछे छोड़कर किसी दूसरे प्रोफेशन को चुनने मजबूर हो जाता है।

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