नईदुनिया को बच्चों का पत्र - करा दें हमारे स्कूल में शिक्षक का इंतजामUpdated: Sun, 10 Sep 2017 12:17 PM (IST)

हाईस्कूल के छात्रों ने नईदुनिया को चिट्ठी लिखकर स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति कराने का अनुरोध किया है।

सुनील तिवारी/संदीप तिवारी, कसडोल/रायपुर। कसडोल विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे ग्राम पंचायत रीकोकला के हाईस्कूल के छात्रों ने नईदुनिया को चिट्ठी लिखकर स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति कराने का अनुरोध किया है। शिक्षकों के बिना यहां के 78 बच्चों का भविष्य अंधेरे में है। नाउम्मीदी के बीच 10वीं कक्षा के 35 बच्चों ने नईदुनिया पर भरोसा जताते हुए पोस्टकार्ड भेजा है, जिसमें बताया है कि गांव में 15 अगस्त 2011 से स्कूल शुरू हुआ है। तब से 5 साल तक तो बिना शिक्षक के स्कूल चला। फिर पिछले साल एकमात्र शिक्षक की पदस्थापना हुई। शिक्षक के बिना परीक्षा परिणाम साल-दर-साल गिरता जा रहा है। मजबूरन अभिभावक टीसी निकाल कर बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करा रहे हैं।

वर्तमान में रीकोकला स्कूल में कक्षा 9वीं में 28 व 10वीं में 50 विद्यार्थी हैं। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को लगातार आवेदन देते रहने से मिडिल स्कूल के शिक्षकों को हाईस्कूल में संलग्न कर दिया गया। जाहिर है कि इससे खास फायदा नहीं हुआ। क्योंकि शिक्षक दोहरी जिम्मेदारी क्यों कर उठाते। अक्टूबर 2016 में गणित के शिक्षक छत्रपाल सिंह बंधन की पदस्थापना की गई, लेकिन अन्य विषयों की पढ़ाई ठप है। बच्चे घबराए हुए हैं कि बोर्ड की परीक्षा कैसे दे पाएंगे। पालक सहदेव साहू व दुलीचंद डड़सेना ने बताया कि कुछ वर्षों तक ग्रामीण ने चंदा कर पढ़े-लिखे बेरोजगारों को स्कूल में पढ़ाने के लिए रखा, लेकिन पैसों की कमी के चलते यह भी बंद हो गया। पंचायत के माध्यम से कलेक्टर, विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन दे चुके, लेकिन शिक्षक की व्यवस्था नहीं हुई।

कलेक्टर साहब... बड़ी कृपा होती

10वीं कक्षा के विद्यार्थियों डुमेश कुमार दीवान, चेतन कुमार ठाकुर, ओमकुमार डडसेना, प्रीतम साहू, नुकेश कुमार, गजेन्द्र कुमार साहू, गोपाल सोनी, देवेश्वरी डडसेना, भूपेन्द्र साहू आदि ने कहा कि उनका भविष्य दांव पर है। कलेक्टर साहब तत्काल अस्थाई ही सही, शिक्षकों की व्यवस्था करा देते तो बड़ी कृपा होती।

घटता जा रहा परीक्षा परिणाम

प्रभारी प्राचार्य तरुण कुमार नायक ने कहा कि शिक्षक नहीं होने से परीक्षा परिणाम घटता जा रहा है। गत वर्ष मात्र 34 फीसद रिजल्ट रहा। संलग्नीकरण से मिडिल स्कूल की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। शिक्षक छत्रपाल सिंह बंधन ने कहा कि मिडिल स्कूल के शिक्षक कभी-कभार ही आते हैं। बच्चों के सामने विकट समस्या है।

दो हजार स्कूल में हैं सिर्फ एक शिक्षक

शिक्षकों के भर्ती के नाम पर अभिभाजित मध्यप्रदेश से लेकर अभी तक कई तरह के प्रयास हुए। इसके बावजूद विभाग शिक्षकों की पूर्ति करने में फेल साबित हुआ है। वर्तमान में विद्यामितान के नाम से आउटसोर्सिंग करके शिक्षकों की भर्ती हुई, फिर भी कमी दूर नहीं हुई है। रीकोकला का स्कूल कोई अकेला स्कूल नहीं है, जहां सिर्फ एक शिक्षक हैं। पिछले साल तक का आंकड़ा देखें तो प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक प्रदेश में 2 हजार स्कूल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।

टीचर की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए मिडिल के शिक्षकों से शैक्षणिक कार्य करा रहे हैं, ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो।

- जीआर चंद्राकर, डीईओ

करीब 4 हजार शिक्षकों के भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल शिक्षक तो नहीं मिल सकते लेकिन दो महीने के भीतर समस्या दूर कर ली जाएगी।

- विकास शील, सचिव, स्कूल शिक्षा

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