सर्वे तीन करोड़ का भले हुआ हो पर दोनों फ्लाईओवर का निर्माण खटाई मेंUpdated: Mon, 11 Sep 2017 08:53 PM (IST)

शहर के जीई और जेल रोड पर फ्लाईओवर के निर्माण में रोड़ा लग गया है।

रायपुर। शहर के जीई और जेल रोड पर फ्लाईओवर के निर्माण में रोड़ा लग गया है। ये और बात है कि इनके सर्वे में तीन करोड़ रूपये खर्च हुए। दरअसल वित्त विभाग के इस साल के बजट में फ्लाईओवर निर्माण है ही नहीं।

लोक निर्माण विभाग ने केवल निर्माण लागत पर वर्ष 2016-17 के बजट में जीई रोड और जेल रोड पर फ्लाईओवर का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया था। वित्त विभाग ने उसे अपने बजट में शामिल भी कर लिया।

इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने मुंबई की कंपनी से विस्तृत सर्वे भी करा लिया। इसमें पता चला कि तोड़फोड़ करने पर मुआवजा देना होगा जो लागत से ज्यादा पहुंच सकता है। अब चूंकि वित्त विभाग ने इन्हें अपने बजट से बाहर कर दिया है। ऐसे में दोनों फ्लाईओवर की योजना खटाई में पड़ गई है।

देना होगा दो गुना मुआवजा इसलिए नहीं दी अनुमति

राजाधानी में इन दिनों शास्त्री चौक पर बनने वाले स्कायवॉक का कांग्रेस और कुछ संगठन के लोग विरो कर रहे हैं। उनकी मांग स्कायवॉक की जगह बजट में घोषित दोनों फ्लाईओवर का निर्माण कराने की है। जब पीडब्ल्यूडी विभाग से जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि जब दो फ्लाईओवर की घोषणा हुई तब स्कायवॉक की परिकल्पना ही नहीं थी।

बजट में आने के बाद पीडब्ल्यूडी ने मुंबई की कंपनी क्यूब इंजीटेट के साथ सर्वे के लिए तीन करोड़ रू. में अनुबंध किया। कंपनी ने जेल रोड पर फ्लाईओवर के लिए तेलघानी नाका से स्टेशन गुरुद्वारा व स्टेशन चौक से फाफडीह चौक तक और जीई रोड पर फ्लाईओवर के लिए तात्यापारा चौक से शारदा चौक तक व्यापक पैमाने पर तोड़फोड़ करने की रिपोर्ट दी।

इसमें कुछ बड़े होटल्स, शोरूम, दुकानें, ऑफिस भी आ रहे थे। दोनों ही रोड पर जमीन की कीमत 2500 रुपये प्रति वर्गफुट से ज्यादा है। नई भू-अर्जन नीति के तहत सरकार को जमीन की दर का दोगुना मुआवजा देना होता। इस कारण सरकार ने प्रशासकीय स्वीकृति नहीं दी।

दोनों प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण

पीडब्ल्यूडी ने सरकार से स्वीकृति की प्रत्याशा में दोनों फ्लाईओवर को 2017-18 के अपने बजट में रखा लेकिन सरकार ने पुनर्परीक्षण का निर्देश जारी कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर फ्लाईओवर के दोनों प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर से तो नहीं लेकिन खारिज कर दिए गए हैं। इसी कारण शास्त्री चौक पर स्कायवॉक का प्रस्ताव तैयार हुआ और सरकार ने उसे तत्काल स्वीकृति भी दे दी।

सर्वे कराकर पीडब्ल्यूडी ने रोका पेमेंट

पीडब्ल्यूडी ने सर्वे कराकर मुंबई की कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट ले ली लेकिन इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना मुमकिन नहीं लग रहा। इस कारण विभाग ने कंपनी का पेमेंट रोक दिया है। अधिकारियों से ही पता चला है कि कंपनी ने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दे दी है।

दो फ्लाईओवर की हुई थी घोषणा

- पहला - तेलघानी नाका चौक से स्टेशन चौक, फाफडीह चौक, अंबेडकर अस्पताल चौक, शास्त्री चौक, गौरवपथ पर पुराना पीएचक्यू तक।

लंबाई - 2.5 किमी

अनुमानित लागत - 229 करोड़ रु.

- दूसरा - राजकुमार कॉलेज से आमापारा चौक, तात्यापारा चौक, जयस्तंभ चौक, शास्त्री चौक पर आकर पहले फ्लाईओवर से मिल जाता।

लंबाई - 3 किमी

अनुमानित लागत - 250 करोड़

फ्लाईओवर के लिए प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली है। न बजट जारी हुआ है और न ही टेंडर। बजट की राशि के गबन का आरोप बेबुनियाद है। अगर गबन या भ्रष्टाचार का किसी के पास प्रमाण है तो शपथपत्र के साथ लोकायुक्त जाए मैं चुनौती देता हूं। स्कायवॉक जनता की मांग पर बन रहा है। मेरे बंगले में महापौर, नगर निगम सभापति समेत कई जनप्रतिनियिों ने स्कायवॉक का प्रेजेंटेशन देखा है। स्कायवॉक तो बनेगा ही - राजेश मूणत पीडब्ल्यूडी मंत्री छत्तीसगढ़

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