Live Score

भारत 5 विकेट से जीता मैच समाप्‍त : भारत 5 विकेट से जीता

Refresh

ओडिशा व झारखंड के जंगल से मवेशियों को पहुंचा रहे कत्लखानेUpdated: Fri, 19 May 2017 04:02 AM (IST)

मवेशी तस्कर कानून को चुनौती देते हुए मवेशियों को मारते-पीटते ले जाते इन क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं।

कोतबा/रायगढ़ । जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से धड़ल्ले से मवेशी तस्करी हो रही है । सप्ताह हजारों से मवेशियों को ओडिशा और झारखंड के जंगल होते हुए कत्लखाने ले जाया जा रहे है। मवेशी तस्कर कानून को चुनौती देते हुए मवेशियों को मारते-पीटते ले जाते इन क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं।

क्षेत्र के जंगलों के रास्ते मवेशी तस्करी का कारोबार बड़े पैमाने पर होने लगा है। मवेशियों को गंभीर चोट पहुंचाया जाता है और बिना आहार और पानी लंबी दूरी तक सफर कराया जाता है। क्षेत्र में तस्तर इतने सक्रिय है कि खुले आम गांव की पगडंडियों से मवेशियों को ले जाते हैं।

जशपुर जिले की सीमा में मवेशियों का प्रवेश होते ही कानून का उलंघन देखने को मिलता है और प्रशासनिक सक्रियता भी इस अवैध तस्करी को रोकने दिखाई नहीं दे रही है। प्रत्येक गांवों में पुलिस सहित अन्य विभागों के द्वारा कई समितियों का गठन ग्राम स्तर पर किया गया है।

इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण गौ रक्षा समितियां भी इन दिनों निष्क्रीय हो गई हैं। जशपुर जिले में मवेशियों की तस्करी पत्थलगांव से लगे रायगढ़ जिले के राजा पारा बाजार से प्रांरभ होती है। पत्थलगांव से इन दिनों तीन रास्तों का उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा है।

सबसे अधिक पत्थलगांव से कोतबा क्षेत्र होते हुए जहां मवेशियों को उड़ीसा और झारखंड सीमा में ले जाया जाता है। वहीं जशपुर और बगीचा विकासखंड के विभिन्न गांवो से होते हुए बगीचा और मनोरा विकासखंड के सोनक्यारी, सन्ना, चंपा, आस्ता आदि गांवों से झारखंड और बिहार के बूचड़खानों में मवेशियों को ले जाया जा रहा है।

इससे पहले मनोरा और डड़गांव के रास्ते झारखंड के गोविंदपुर बाजार को माध्यम बनाया जाता था। लेकिन डूमरी पुलिस के द्वारा गोविंदपुर बाजार को बंद कराकर कड़ी कार्रवाई किए जाने के बाद कुछ दिनों से गोविंदपुर क्षेत्र से तस्करी नहीं हो रही है।

इसके बाद तस्कर सोनक्यारी, सन्ना, चंपा, आस्ता आदि क्षेत्रों के माध्यम से बूचड़खानों में मवेशियों को पहुंचा रहे हैं। वहीं कुनकुरी, दुलदुला विकासखंड में भी तस्करों का बड़ा जाल है, जहां से सीधे झारखंड मवेशियों को ले जाया जा रहा है। इस क्षेत्र में तस्कर सबसे अधिक रात का उपयोग करते हैं।

ग्रामीणों की आड़

मवेशी तस्करी के मामले में कई दलाल सक्रिय हैं। बड़े व्यापारियों के गुर्गे ग्रामीण स्तर पर युवाओं को तैयार करते हैं और निश्चित स्थान तक पहुंचाने के लिए ठेका दिया जाता है। जब ग्रामीण युवक मवेशियों को ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जाते हैं तो उनके उपर सीधे आरोप नहीं लगता है।

राजापारा बाजार से जब खरीददारी होती है तो झारखंड और ओडिशा के बड़े व्यापारी बाजार में होते हैं और हाक कर ले जाने वाले मजदूरों सहित अपने आदमियों को मवेशियां का जिम्मा देकर वे सीमा पार मवेशियों के संपर्क में आते हैं।

इस दौरान आबादी वाले क्षेत्रों में जंगल के अंदर में भी बड़ी संख्या में मवेशियों को ले जाया जाता है, जहां से लोगों को यह परिवहन नजर नहीं आता है। वहीं कई इलाको में देखने को मिल रहा है कि खुलेआम मवेशियों को गांव से लगे रास्तों से ले जाया जा रहा है।

मवेशियों को नियम स्थान तक ले जाने के लिए एक मजदूर को दो से पांच हजार तक दिया जाता है। सीमा पार कराने में तस्करों के मजदूरों को लगभग सात दिन का समय लगता है। इससे पहले सबसे अधिक उपयोग तस्करी के लिए जशपुर विकासखंड का होता था।

पिछले वर्षों पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत के द्वारा इसे रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसके बाद जशपुर और मनोरा विकासखंड में तस्करी पर काफी लगाम लगी। उल्लेखनीय है कि गौ रक्षकों के द्वारा मवेशियों को रोकने पर तस्करों के द्वारा पूर्व में एक गौ रक्षक की हत्या भी की जा चुकी है।

कृषि के नाम बूढ़े मवेशियों का उपयोग

पूर्व में जन आंदोलन के बाद जशपुर के साप्ताहिक मवेशी बाजार को बंद कर दिया गया था। इसके बाद तस्करों ने पत्थलगांव से लगे राजापारा के बाजार को अपना प्रमुख बाजार बनाया। यहां कृषि कार्य के नामपर मवेशी बाजार का संचालन किया जाता है। लेकिन कुछ मवेशियों को छोड़कर आधे से अधिक बूढ़े और देशी नस्लों के मवेशियों को कत्लखाने ले जाया जा रहा है।

यहां खरीदी के नाम पर एक रशीद भी तस्करों को दी जाती है, जिसे दिखाकर तस्कर इसे वैद्यानिक बताने की कोशिश करते हैं। लेकिन पशु कल्याण अधिकारी व अभिभाषक रामप्रकाश पांडे ने बताया कि जब मवेशियों को पैदल परिवहन लंबी दूरी तक कराया जाता है तो वह परिवहन ही अवैधानिक है और इस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।

'' जशपुर सहित मनोरा विकासखंड में मेरी टीम और ग्रामीणों के द्वारा तस्करी रोकने बेहतर कार्य किया गया है। पुनः तस्कर सक्रिय हो गए हैं तो इस दिशा में अभियान चलाया जाएगा और पुलिस प्रशासन से भी कार्रवाई के लिए मांग की जाएगी।'' - गणेश राम भगत, पूर्व अजाक मंत्री ।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.