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तंत्र साधना के लिए दे दी थी बेटे की बलि, आरोपी पिता को उम्रकैदUpdated: Thu, 18 May 2017 02:13 AM (IST)

जनवरी 2016 में भगवानपुर व गोरखा के बीच सुनसान इलाके में एक बच्चे का शव मिला था जो सर व धड़ अलग था।

रायगढ़ । जनवरी 2016 में भगवानपुर एवं गोरखा के बीच तंत्र तंत्र की साधना करते हुए अपने पुत्र की हत्या कर दी थी, जिसमें विशेष न्यायालय द्वारा फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता रणविजय भारती (38 वर्ष) को आजीवन कारावास व 5000 रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित करते हुए फैसला सुनाया है अर्थदण्ड के राशि की अदायगी नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।

मामला इस प्रकार है कि जनवरी 2016 में भगवानपुर व गोरखा के बीच सुनसान इलाके में एक बच्चे का शव मिला था जो सर व धड़ अलग था। विवेचना के दौरान पता चला कि शव 14-15 वर्ष के चंदन भारती नाम के एक बच्चे की है इसका पिता रणविजय भारती खैरपुर में रहकर रोजी मजदूरी करता था।

आरोपी मूल रूप से उत्तरप्रदेश आजमगढ़ के ग्राम छतौना का निवासी था और गरीबी व आर्थिक तंगी की दौर से गुजर रहा था। खैरपुर में वह अपनी दो बेटियों व एक बेटे के साथ रहता था जबकि मां घटना के दौरान उत्तर प्रदेश ग्राम छतौना गई हुई थी।

घटना के एक दिन पूर्व मृतक पुत्र चंदन के कहने पर आरोपी पिता आजमगढ़ ग्राम छतौना में मोबाइल से मृतक की उसकी मां से भी बात कराई और इसी कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंची थी। छानबीन के बाद आरोपी को ग्राम छतौना से गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार कर आरोपी के बयान लेकर धारा 302, 201 दर्ज कर विवेचना उपरांत न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई पश्चात आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दण्डित की गई।

फैसला देते हुए विशेष न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश मनीष कुमार ने कहा कि चूंकि आरोपी को आजीवन कारावास का दण्ड देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। इसलिए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया जाता है। अभियोजन पक्ष की ओर लोक अभियोजक एके श्रीवास्तव ने पैरवी किया।

घर से कब निकले पता नहीं

घटना के बाद आरोपी की छानबीन करते हुए पुलिस खैरपुर स्थित उसके हाल मुकाम पहुंची जहां उसकी दो बहने अपने पिता व भाई का इंतजार कर रही थी। उन्हें इस बात का जरा भी ज्ञान नहीं था कि उसके पिता ने उसके भाई की तंत्र मंत्र सिद्घी के लिए हत्या कर दी है।

जब उसकी बेटियों ने बताया कि उसके पिता और भाई चंदन रात में खाना खाकर एक साथ सोए थे पिता और उसके भाई रात को कितने समय घर से निकले पता नहीं जब वे सुबह सोकर उठे तब पिता और भाई घर पर नहीं थे।

तंत्र मंत्र कर आर्थिक रूप से बनना चाहता था धनवान

पूछताछ के दौरान आरोपी के पास से तंत्रमंत्र की किताब भी बरामद हुई थी। आरोपी के अनुसार वह बेहद गरीबी में जीवन यापन कर रहा था वह आर्थिक रूप से सम्पन्न बनना चाहता था इसी को लेकर वह अपने पुत्र को लेकर घटना दिनांक को बलि दिया था। मामला सामने आने के बाद जिले में नरबलि मामले में पूरे शहरवासी सिहर गए थे।

समाज के नैतिक मूल्यों को झकझोर दिया

सुनवाई के दौरान अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी का यह प्रथम अपराध है और वह परिवार का एक मात्र कमाने वाला व्यक्ति है उसके छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। इसलिए कम से कम सजा दी जाए।

इस पर अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने अपना तर्क देते हुए कहा कि आरोपी का सुनियोजित तरीके से पैशाचिक कृत्य समाज के नैतिक मूल्यों को झकझोर देने वाली है इसलिए आरोपी को अधिक से अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।

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