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शासकीय अवकाश के दिन डॉक्टर मिलते ना ही दवाUpdated: Thu, 06 Apr 2017 04:04 AM (IST)

शासकीय अवकाश के दिन अस्पताल की व्यवस्था भगवान भरोसे रहती है।

रायगढ़। शासकीय अवकाश के दिन अस्पताल की व्यवस्था भगवान भरोसे रहती है। यहां ना तो इमरजेंसी डॉक्टर मिलते हैं और ना ही मरीजों को दवाई मिल पाती है। मरीजों की परेशानी को सुनने के लिए भी वहां कोई नहीं होता। ऐसे में अवकाश के दिन अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। समुचित स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख करते हैं।

रविवार हो अथवा किसी तरह का कोई भी शासकीय अवकाश, उस दिन अस्पताल में इलाज सुविधा बिलकुल भी बंद रहती है। ये दावा अस्पताल पहुंचे मरीजों द्वारा किया जा रहा है। मंगलवार को रामनवमी के चलते शासकीय अवकाश थी। चूंकि पूर्व से ही विभिन्न शासकीय अवकाशों के दिन अस्पताल में ओपीडी सेवा पूरी तरह से बंद रहती है। मगर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के इलाज के एक इमरजेंसी चिकित्सक वहां मौजूद रहता है।

ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बाधित ना हो सकें। लेकिन जब से मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अपने हाथ में अस्पताल की जवाबदारी ली है तब से यहां स्वास्थ्य सेवा बाधित हो रही है। यही वजह है कि शासकीय अवकाश के दिन भी इमरजेंसी डॉक्टरों का अभाव बना रहता है। पिछले मंगलवार को एक ऐसे ही मामले में राजेश पांडेय हाथ की परेशानी लेकर अस्पताल पहुंचे।

मगर यहां पर उस समय कोई भी चिकित्सक नहीं बैठा था। नईदुनिया को उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना में उनका हाथ चोटिल हो गया था। जिसके बाद वे दर्द से कराहते हुए अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने कई वार्डों का चक्कर लगाया मगर एक भी डॉक्टर नहीं मिले।

खास बात तो ये रही कि वे जिस वार्ड में जाते वहां से उन्हें ये कहकर वापस लौटाया जाता कि आपातकालीन ओपीडी में इमरजेंसी डॉक्टर बैठे हुए हैं उनसे संपर्क कर लें। इस तरह कई वार्डों का दौरा करने के पश्चात जब वे आपातकालीन वार्ड में पहुंचे तो यहां के डॉक्टर नदारद थे। ऐसे में निराश होकर वे अंततः प्राइवेट अस्पताल पहुंचे और उन्होंने करीबन 2 हजार रुपए खर्च करके अपना इलाज कराया।

डॉक्टर बरतते हैं लापरवाही

अवकाश के दिन खासकर यहां के चिकित्सकों द्वारा लापरवाही बरतने की शिकायत मिलती है। हालांकि उनके द्वारा बरती गई लापरवाही की शिकायत मिलने पर अधीक्षक की ओर से उन्हें जमकर फटकार भी सुनाई जाती है। बावजूद इसके यहां कार्यरत चिकित्सक अपनी मनमानी से बाज नहीं आते।

प्राइवेट अस्पतालों कमा रहे मुनाफा

इस तरह शासकीय अवकाश के दिन डॉक्टरों के नहीं मिलने से यहां पहुंचे ज्यादातर मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए प्राइवेट अस्पताल की शरण में पहुंचते हैं। ऐसे अस्पताल मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी फीस वसूलने के लिए खोले गये हैं। मरीज जब यहां अपनी परेशानी दिखाते हैं तो निजी अस्पताल इनसे 2 से 3 हजार रुपए तक वसूली कर लेते हैं। मजबूर मरीजों के सामने रुपए पटाने के अलावा दूसरा चारा नहीं रहता।

शासकीय अवकाश में हमारी इमरजेंसी सेवा शुरू रहती है। अगर इसके बाद भी यहां के डॉक्टर लापरवाही बरत रहे हैं तो मैं इस मामले की जानकारी लेता हूं।

डॉ. एएम लकड़ा, अधीक्षक, शासकीय मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल

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