ऐप के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल करके क्षेत्र में की जा रही है ठगीUpdated: Wed, 15 Mar 2017 12:16 AM (IST)

जब किसी के मोबाइल पर कोई अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आता है तो वह न सिर्फ चौकन्ना हो जाता बल्कि डर भी जाता है।

विनय पाण्डेय, रायगढ़। जब किसी के मोबाइल पर कोई अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आता है तो वह न सिर्फ चौकन्ना हो जाता बल्कि डर भी जाता है। कई बार ऐसे कॉल से ठगी और धमकी के भी मामले सामने आए हैं। चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय होता है इसलिए पुलिस भी कुछ कर नहीं पाती है। लेकिन मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय कॉल एक ऐप को मोबाइल पर डाउनलोड कर आसानी से किया जाता है। वहीं इसकी सहायता से सोशल मीडिया में आईडी बना ली जाती है।

अंतराष्ट्रीय नंबर से कॉल पर समय समय पर मोबाइल कंपनियां भी लोगों को एसएमएस के जरिये सचेत करती रहती हैं कि इस तरह की कॉल को रिसीव न करें और इससे बचें। उनके द्वारा एक नंबर भी दिया जाता है जिसपर कॉल करने कहा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय कॉल को लेकर इतनी भ्रम की स्थिति है कि थाने में यदि कोई ठगी आदि की रिपोर्ट लिखाने जाता हैं तो पुलिस की पहली प्रतिक्रिया होती है कि यह तो विदेश की कॉल है, हम क्या करेंगे। ऐसे में कई लोग जो विदेशी कॉल से ठगी का शिकार होते हैं वह कई बार थाने जाते ही नहीं। उनको लगता है कि यहां की पुलिस विदेश से किसी को पकड़कर नहीं ला पाएगी।

ऐसे बनता है सामान्य सिम अमेरिकन

गूगल के प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड होते ही आपके मोबाइल पर अपने आप अमेरिका, ब्राजील, साउथ अफ्रीका या ईजीप्ट का नंबर आ जाता है। उस नंबर के आने के बाद तीन स्टेप के बाद वह नंबर आपके नाम हो जाता है। उस नंबर से आप कॉल, मैसेज, वॉट्सएप या किसी सोशल मीडिया पर आईडी बना सकते हैं। इस नंबर से कॉल करने पर अंतरराष्ट्रीय नंबर कॉल किए गए व्यक्ति के स्क्रीन पर आता है।

कैसे हो पहचान

ऐसी कॉल की पहचान सामान्य तरीके से संभव नहीं है। इसके लिए उस कॉल से आईपी नंबर की पहचान होने के बाद ही पता चल पाता है कि यह कॉल एप से किया गया है या वाकई अंतरराष्ट्रीय है। कॉल का लोकेशन मिलना भी दूभर होता है। जैसे आम कॉल का लोकेशन तुरंत मिल सकता है, उसके लिए ट्रू कॉलर जैसे कई एप मौजूद हैं। लेकिन यह कॉल ट्रू कॉलर द्वारा ट्रेस नहीं होती है।

जिले में हैं कई केस

अंतरराष्ट्रीय कॉल से ठगी के करीब एक दर्जन केस जिले में हैं, जिसपर पुलिस मशक्कत कर रही है। लेकिन उस नंबर को ट्रेस करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार सोशल मीडिया द्वारा किए गए अपराध के लिए सोशल मीडिया के सेंटर्स से डिटेल ली जाती है।

पुलिस को करनी पड़ती है मशक्कत

एसपी बीएन मीणा के अनुसार इस तरह की कॉल और उससे होने वाले अपराध आम हैं, लेकिन इसके लिए एक्सपर्ट की जरूरत होती है। यहां कुछ एक्सपर्ट हैं पर मामले ज्यादा होते हैं। ऐसे में किसी केस की पूरी डिटेल निकालने में मुश्किल होती है। हम ज्यादातर ऐसे कॉल की डिटेल और लोकेशन निकालने में कामयाब रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट की कमी

जिले ही नहीं पूरे राज्य में साइबर एक्सपर्ट की कमी है। यहां मामले ज्यादा हैं एक्सपर्ट सिर्फ एक। एक केस साल्व करने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जैसे नंबर को ट्रेस करने ऑपरेटर को पत्र लिखना, उस पत्र से लोकेशन खोजना उसके बाद व्यक्ति की पहचान करना। इसके अलावा संबंधित जगह पत्राचार करना। लेकिन इस कार्य के लिए अलग से कोई आदमी नहीं होता, इस काम को ज्यादातर क्राइम ब्रांच के लोग करते हैं।

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