सेनेटोरियम में सुविधा नहीं , रिफर सेंटर बनाUpdated: Thu, 14 Sep 2017 12:46 AM (IST)

पेंड्रा। नईदुनिया न्यूज क्षेत्र की सबसे बड़ी सेनेटोरियम में सुविधा संसाधन के अभाव में अस्पताल खुद ही बीमार है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं परंतु सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बिलासपुर रिफर कर दिया जाता है। अधिकारियों को शिकायत के बाद अभी तक प्रशासन के द्वारा सुध नहीं ली गई है। एफआरयू सेंटर का दर्जा प्राप्त सेनेटोरियम अपनी बदाहल पर आंसू

पेंड्रा। नईदुनिया न्यूज

क्षेत्र की सबसे बड़ी सेनेटोरियम में सुविधा संसाधन के अभाव में अस्पताल खुद ही बीमार है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं परंतु सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बिलासपुर रिफर कर दिया जाता है। अधिकारियों को शिकायत के बाद अभी तक प्रशासन के द्वारा सुध नहीं ली गई है। एफआरयू सेंटर का दर्जा प्राप्त सेनेटोरियम अपनी बदाहल पर आंसू बहने के लिए विवश है। वहीं इसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को होने के बाद उदासीन हैं।

उल्लेखनीय है कि पेंड्रा, गौरेला मुख्य मार्ग में स्थित सेनेटोरियम अस्पताल स्थित है। क्षेत्र की सबसे 30 बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन दो सौ मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके बावजूद केंद्र में मूलभूत सुविधाओं की अत्यंत कमी है। अस्पताल मे 9 चिकित्सकों की जरुरत होती है लेकिन सिर्फ 3 चिकित्सक ही पदस्थ किए गए हैं। मरीजों ने बताया केंद्र में एक चिकित्सक डॉ. भगवान सिंह पैकरा की ड्यूटी बताते हैं पर वे मिलते नहीं हैं। ओपीडी के बाद वार्डों की हालत भी अत्यंत खराब है। महिला वार्ड में पंखा नहीं चलने से मरीज अपने लिए खुद ही पंखे लेकर आते हैं। इसी प्रकार बेड में बिछाने के लिए चादर तक नहीं दी जाती है। कहने के लिए इसे एफआरयू का दर्जा प्राप्त है लेकिन आसपास की दोनों सामुदायिक केंद्रों के चिकित्सक इसकी स्थिति से अवगत होकर मरीजों को सीधे बिलासपुर रिफर कर देते हैं। आपात केि दनों में सबसे जरुरत की चीजें या तो खराब हो गई है या फिर हैं ही नहीं । कहने को तो अस्पताल में दो एक्सरे मशीनें है लेकिन एक तो तीन वर्ष से खराब है और दूसरी भी लगभग बीस दिनों से खराब है। इस प्रकार केंद्र में साफ सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सेनेटोरियम अस्पताल में संसाधन और सुविधाओं को लेकर संस्था संगठन सहित जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से की है इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी है। गौरतलब है कि इस अस्पताल का गौरवशाली इतिहास रहा है। देश में आजादी के पहले चुनिंदा जगहों में टीबी का उपचार होता था। यहां पर स्वास्थ्य के दृष्टि से अनुकूल वातावरण होने के कारण टीवी निवारण केंद्र खोला गया था जहां गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोरअपनी पत्नी के इलाज के लिए आए थे। उनकी पत्नी का देहांत भी यहां हुआ था जिनकी समाधि आज भी मौजूद है। इन सबके बाद अस्पताल की दुःखद स्थिति के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है।

केंद्र में ब्लड बैंक तक नहीं

ब्लड बैंक की सुविधा शासन द्वारा दी गई है लेकिन एक यूनिट ब्लड भी नहीं है। ब्लड बैंक के इंचार्ज ड्यूटी कर खानापूर्ति कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र में ब्लड बैंक के नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर शासन स्मार्ट कार्ड से सभी सुविधाएं दे रही हैं, परंतु केंद्र में सुविधा नहीं होने से मरीज योजनाओं के लाभ से दूर हैं।

स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा संसाधन नहीं है। स्टॉफ की कमी है। पंखे और साफ सफाई पर जल्दी ही ध्यान दिया जाएगा।

- अमर सिंह सेंद्राम, बीएमओ, गौरेला

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