गुपचुप कर रहे थे किशोरी का गर्भपात, हालत बिगड़ी तो पहुंच गए जेलUpdated: Sat, 12 Aug 2017 04:03 AM (IST)

पुलिस ने इस मामले में किशोर, उसकी मां, जीजा व गर्भपात करने वाले झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।

कोरबा। एक नाबालिग किशोर का अपने ही नजदीकी रिश्तेदार किशोरी के साथ प्रेम संबंध होने की वजह से किशोरी गर्भवती हो गई और लोकलाज के डर से किशोरी के परिजन गर्भपात करा दिए। इसकी वजह से किशोरी की स्थिति बिगड़ गई और मामला पुलिस तक जा पहुंचा। पुलिस ने इस मामले में किशोर, उसकी मां, जीजा व गर्भपात करने वाले झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।

हरदीबाजार पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले एक गांव का यह मामला है। बताया जा रहा है कि 16 साल की एक किशोरी के गर्भवती हो जाने पर परिजनों ने पूछताछ की तो किशोरी ने अपने ही परिवार के एक 16 साल के किशोर के साथ शारीरिक संबंध होने की बात स्वीकार की।

एक ही परिवार का मामला था, इसलिए लोकलाज के डर से दोनों परिवार ने इस मामले को अपने स्तर पर ही निपटा लेने का निर्णय ले लिया। 2 अगस्त को 4 माह का गर्भ होने के बाद भी हरदीबाजार के एक झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र सिंह पिता मंगलसिंह राजपूत (40) के क्लिनिक में किशोरी का गर्भपात कराने के बाद मृत बच्चे को ठिकाने लगा दिया गया।

शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल की और नाबालिग किशोर समेत गर्भपात कराने वाली उसकी मां बिमला बाई, जीजा गंगाराम व झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र सिंह के खिलाफ धारा 376, 315, 201, 120बी, 506, 34, 4-8 पाक्सो एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

आपसी विवाद से मामला पहुंचा थाना

परिजन पहले तो आपसी सहमति से मामले को निपटाने किशोरी का गर्भपात करा दिया, पर बाद में पीड़ित किशोरी के परिजन किशोरी के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की। बताया जा रहा है कि आरोपी के परिजनों को किशोरी के नाम पर एक जमीन करने का दबाव बनाया, इस पर बात नहीं बनी। विवाद की स्थिति में किशोरी के परिजनों ने हरदीबाजार पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी।

अब भी झोलाछाप डॉक्टरों की चल रही दुकान

वर्ष 2011 में तात्कालीन सीएमएचओ डॉ. पीआर कुंभकार ने छापेमार कार्रवाई की थी। इस दौरान हरदीबाजार के एक झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक से मानव भ्रूण बरामद किया गया था। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भी वही काम करता था।

काम सीखने के बाद उसने खुद की क्लिनिक खोल ली और असंवैधानिक कार्य करने लगा। आश्चर्य की बात यह है कि 5 माह पहले प्रशासन ने सभी झोलाछाप डॉक्टरों का क्लिनिक बंद करा दिया था। बावजूद इसके राजेंद्र की अवैध क्लिनिक चल रही थी।

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