GST लागू हुआ तो बेकार हो गया B.com अंतिम वर्ष का सिलेबसUpdated: Mon, 17 Jul 2017 12:56 AM (IST)

व्यावहारिक जीवन में अब इसका इस्तेमाल नहीं, बावजूद इसके कॉमर्स के विद्यार्थियों को इस साल अप्रत्यक्ष कर के बारे में पढ़ना ही होगा।

कोरबा। एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने पर अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) का अस्तित्व स्वमेव समाप्त हो गया, पर महाविद्यालयों में अब भी इस टैक्स की पढ़ाई जारी है। स्नातक शिक्षा अंतर्गत बी-कॉम अंतिम वर्ष के सिलेबस में टैक्स से जुड़ी पाठ्य सामग्री शामिल है। व्यावहारिक जीवन में अब इसका इस्तेमाल नहीं, बावजूद इसके कॉमर्स के विद्यार्थियों को इस साल अप्रत्यक्ष कर के बारे में पढ़ना ही होगा।

केंद्र शासन ने अलग-अलग प्रकार के टैक्स खत्म कर एक जुलाई को जीएसटी यानि वस्तु एवं सेवा कर लागू किया है। बड़े कारोबारी व छोटे व्यवसायी से लेकर आमलोगों तक सभी के लिए अब यही टैक्स प्रभावी रहेगा।

कारोबार का लेखा-जोखा हो या नौकरीपेशा वर्ग, रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग होने वाली चीजें मसलन दूध, मसाले, अचार, शक्कर, खाद्य तेल, नमकीन, चाय व दूध से बनी खाद्य, बस-रेल या हवाई यात्रा, मोबाइल फोन और मोटर-कारों यहां तक कि कॉफी हाउस में चाय-नाश्ते व भोजन में भी जीएसटी ही लागू है।

ऐसे में जबकि अप्रत्यक्ष कर की भूमिका समाप्त हो चुकी है, इस विषय की पढ़ाई भी बेमानी हो जाता है। वक्त रहते इसे लेकर पहल नहीं की गई और मजबूरन कॉमर्स के छात्र-छात्राओं को अगले एक साल बेवजह और बिना उपयोग अप्रत्यक्ष कर के बारे में पढ़ना होगा। कॉलेजों में बी-कॉम अंतिम वर्ष के पाठ्यक्रम में इनडायरेक्ट कर की विषय सामग्री अब भी शामिल है, जिसे वक्त रहते हटाकर जीएसटी को शामिल नहीं किया गया है।

11 कॉलेजों में 1300 विद्यार्थी

जीएसटी लागू होने के बाद इस विषय की उपयोगिता नहीं रही। वाणिज्य, व्यापार, बैंकिंग, लेखा-जोखा और बही-खाते की बारीकियों में अब जीएसटी को शामिल करने की शिक्षा होनी चाहिए। बावजूद इसके जिले के 11 महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 1300 छात्र-छात्राओं को इनडायरेक्ट टैक्स सीखना होगा।

वर्तमान परिदृश्य में वस्तु एवं सेवा कर का इस्तेमाल हर क्षेत्र में होने के साथ ही लेन-देन की वाणिज्यिक बारीकियों में जीएसटी का इस्तेमाल एक अनिवार्य प्रणाली बन चुका है। ऐसे में इसकी पढ़ाई नहीं होने से भी छात्र-छात्राओं को तकनीकी ज्ञान से रूबरू होने वंचित होना पड़ सकता है, जो उनके आगामी भविष्य और कॉमर्स के कॅरियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।

वक्त रहते नहीं हटाया गया

किसी विषय से जुड़ा पाठ्यक्रम तैयार करने, पाठ्य सामग्री हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया संबंधित विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडी विभाग के अधीन होता है। लिहाजा अप्रत्यक्ष कर हटाकर जीएसटी यानि वस्तु एवं सेवा कर को शामिल करने का दायित्व भी बिलासपुर विश्वविद्यालय के इस विभाग को ही निभाना चाहिए था।

बावजूद इसके न तो बीयू के कॉमर्स विभाग ने पहल की और न ही बोर्ड ऑफ स्टडी ने ही कुछ किया। इतना ही नहीं, उच्च शिक्षा विभाग ने भी इस संबंध में न कोई दिशा-निर्देश जारी किया और न ही इसकी स्वयं जानकारी ली। इस लापरवाही का खामियाजा अब कॉमर्स के हजारों छात्र-छात्राओं को भुगतना होगा।

सिलेबस का निर्धारण विश्वविद्यालय का बोर्ड ऑफ स्टडी विभाग करता है। वहीं से नए-पुराने पाठ्यक्रम में बदलाव, विषयों को जोड़ने या हटाने संबंधी निर्णय होते हैं। इस बार बदलाव नहीं किया गया है, लिहाजा संबंधित विषय की पढ़ाई से संबंधित दिशा-निर्देश विश्वविद्यालय से मांगा जाएगा। - डॉ. आरके सक्सेना, प्राचार्य, पीजी कॉलेज

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