2300 स्कूल में 2.50 लाख बच्चे, सुरक्षा भगवान भरोसेUpdated: Tue, 12 Sep 2017 04:00 AM (IST)

गुरूग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई घटना ने एक बार पिᆬर से अभिभावकों को झकझोर दिया है।

कोरबा। बेटा छुट्टी होते ही सीधे घर आना। यह शब्द प्रायः हर मां की होती है, जब बच्चा स्कूल जाने के लिए घर से निकलता है। स्कूलों व आसपास परिसरों में बढ़ते आपराधिक घटनाओं के बावजूद स्कूलों में सुरक्षा को लेकर प्रबंधन गंभीर नजर नहीं आ रही। मोटी फीस लेकर निजी स्कूल के कर्ताधर्ता बेपरवाह हैं, सरकारी स्कूलों में भी सुरक्षा भगवान भरोसे है।

हरियाणा के गुरूग्राम स्थित रेयान इंटरनेशन स्कूल की घटना के बाद नईदुनिया ने सोमवार को पड़ताल की। इस दौरान देखा गया कि अधिकांश स्कूल में बच्चों की जिंदगी के साथ सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ चल रहा।

शिक्षा विभाग की मानें तो जिले में संचालित प्राइमरी से हाईस्कूलों में 3 लाख 89 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत्‌ हैं। इन छात्र-छात्राओं में अकेले प्ले स्कूल से लेकर प्राइमरी स्कूलों में 3 से 12 वर्ष की आयु वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 2 लाख 20 हजार है।

इन बच्चों की सुरक्षा के लिए जिस तरह से संज्ञान में लिया जाना चाहिए, उसमें प्रशासनिक तौर पर ढील दी जा रही है। शहर के मुख्य मार्ग में स्थित निर्मला हायर सेकेंडरी, सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी स्कूल सड़क से जुड़े हैं। प्रतिदिन स्कूल पहुंचने से लेकर घर आने तक बच्चों को खतरा मोल लेना पड़ता है।

गायत्री स्कूल के दीवाल से जुड़े ठेले-गुमटियों में गुटखा पाउच जैसे सामानों की बिक्री होती है। सेंट जेवियर्स, न्यूएरा, जोसेफ थॉमस जैसे बड़े स्कूलों से चलने वाली बसों में बच्चों की भीड़ अव्यवस्था को दर्शाती है।

निजी स्कूलों में गार्ड की असुविधा, तंग कमरों में स्कूल का संचालन, बगैर परमिट के वाहन में बच्चों को लाना जैसे कई नजारे आसपास के स्कूलों में देखा जा सकता है। बच्चों की सुविधा के लिए जागरूकता तब तक नहीं आती, जब तक कोई घटना न हो जाए। गुरूग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई घटना ने एक बार पिᆬर से अभिभावकों को झकझोर दिया है।

चालक ने 5 साल की बच्ची के साथ की थी हैवानियत

दर्री थाना क्षेत्र में एक पांच साल की नर्सरी में पढ़ने वाली बच्ची के साथ बीते माह स्कूल वैन के चालक ने हैवानियत की थी। अनाचार के मामले में चालक को गिरफ्तार किया गया। अकेले सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक संचालित 810 स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है। पंपहाउस, इमलीडुग्गु, अयोध्यापुरी, कोहड़िया जैसे हाईस्कूलों में बाउंड्रीवाल की सुविधा नहीं है। यहां पढ़ने वाली छात्राओं के साथ आए दिन छेड़छाड़ की घटना होते रही है। इसके अलावा 32 बालक व बालिका छात्रावास हैं, जहां आज भी बाउंड्रीवाल की सुविधा नहीं है।

एक भी बस में नहीं महिला कंक्टर

बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए शहर के प्रत्येक बड़े स्कूलों में बस की व्यवस्था है। यातायात विभाग के अनुसार जिले में 47 स्कूल बसें संचालित है। हैरत की बात है कि एक भी बस में महिला कंडेक्टर या ड्राइवर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा को लेकर 17 बिंदुओं में गाइडलाइन जारी की है। इन बिंदुओं का अधिकांश स्कूल में परिपालन नहीं हो रहा है। नियम की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई का अभाव देखा जा रहा है।

अब हो रही लाइसेंस की जांच

अक्सर दुर्घटना होने के बाद ही प्रशानिक अमले की ओर से सतर्कता की औपचारिकता बरती जाती है। गुरूग्राम हुई घटना के बाद हरकत में आए यातायात पुलिस ने सोमवार को स्कूल वाहनों की जांच की गई। यातायात पुलिस ने स्कूलों में जाकर परिचालकों के लाइसेंस, बस की फिटनेस आदि की जानकारी ली गई।

कार्रवाई के दौरान सेंट जेवियर्स स्कूल से चलने वाली बस का तार टूटा पाए जाने पर 1000 जुर्माना किया गया है। कार्रवाई में एसएस पटेल यातायात निरीक्षक, एएसआई मालिक राम, सहायक उपनिरीक्षक कुजूर आदि उपस्थित थे।

जिले के स्कूलों में बच्चों की संख्या

स्कूल संख्या दर्ज संख्या

प्राथमिक शाला 15261,38,913

मिडिल स्कूल51398000

हाईस्कूल23219834

हायर सेकेंडरी19217893

(टीपः- इसमें 312 निजी स्कूल भी शामिल हैं।)

अभिभावक-टीचर की जिम्मेदारी

0 बच्चों को रोज पूछें कि उनका दिन कैसा रहा ।

0 शारीरिक अंगों के प्रति जागरूक करना चाहिए ।

0 स्कूल की मीटिंग में भागीदारी जरूर निभाएं ।

0 तबियत खराब होने की स्थिति में एक्शन लें ।

इस तरह हो रही खानापूर्ति

0 अधिकांश स्कूलों में नहीं लगे हैं सीसी कैमरे ।

0 गार्ड के अभाव में स्कूलों में असुरक्षा ।

0 अभिभावकों या परिजनों का बच्चों से मिलना आसान ।

0 फायर सेफ्टी दशा बदतर ।

क्या कहते हैं अभिभावक

प्रशासन ले सुरक्षा का जायजा

बच्चों के साथ हो रही घटना को सुनकर दिल सिहर उठता है। स्कूल प्रबंधन जिस तरह से बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं, उस पर प्रशासनिक निरीक्षण के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। - हेमेश्वर श्रीवास, जेलगांव

वाहनों की हो नियमित जांच

स्कूल प्रबंधनों को चाहिए कि वे विश्वसनीय चालक रखें। बस के साथ स्कूल में सीसी कैमरे लगाया जाना चाहिए। इमर्जेंसी सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंधन किया जाना चाहिए। - देवेंद्र महतो, बरपाली

अभिभावकों में भी जागरूकता जरूरी

एक तरफा सोच से ऊपर उठकर अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। बच्चों को विश्वास में लेकर होने स्कूल में होने वाली हर घटनाओं की जानकारी लेना चाहिए। - पूनम तिवारी, एमपी नगर

नियम का सख्ती से हो पालन

स्कलू प्रबंधन से लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा संबंधी कई नियम बनाए जाते हैं। इन नियमों का सख्ती से पालन कराने में अभिभावक व स्कूल प्रबंधन में सामंजस्य होना जरूरी है। - राखी पांडेय, एमपी नगर

गाइडलाइन की गई है जारी

आपराधिक घटनाओं को लेकर स्कूल प्रबंधन के लिए पहले से ही गाइडलाइन जारी की जा चुकी है। बच्चे स्कूल से पढ़कर सुरक्षित घर पहुंचे, इसके लिए स्कूल में व्यापक प्रबंध किया जा रहा है। प्रशासन, पुलिस, अभिभावक व शिक्षकों की सामूहिक पहल से ही सुरक्षा व्यवस्था में कसावट लाई जा सकती है। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। - डीके कौशिक, जिला शिक्षा अधिकार

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