अब तक नहीं मिली मंजूरी, कैसे हो बाघों का संरक्षणUpdated: Wed, 04 Jun 2014 09:40 PM (IST)

भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार और एनटीसीए गंभीर नहीं दिख रही है। वन विभाग दो वर्ष पहले टाईगर रिजर्वं, कॉरीडोर तथा बाफरजोन बनाने के लिए प्रस्ताव राज्य शासन व एनटीसीए को भेज चुकी है। लेकिन अब तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों का संरक्षण करना चुनौती बन गया है।

कवर्धा (ब्यूरो)। भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार और एनटीसीए गंभीर नहीं दिख रही है। वन विभाग दो वर्ष पहले टाईगर रिजर्वं, कॉरीडोर तथा बाफरजोन बनाने के लिए प्रस्ताव राज्य शासन व एनटीसीए को भेज चुकी है। लेकिन अब तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों का संरक्षण करना चुनौती बन गया है।

कान्हा-अचानकमार टाईगर अभ्यारण्य के बीच स्थित भोरमदेव अभ्यारण्य में तीन वर्षों में लगभग 5 से अधिक बाघों के मौजूदगी के प्रमाण वन विभाग को मिले है। बीते दिनों पंडरिया व जामुनपानी के जंगल में दो बाघों की निर्मम हत्या भी हो चुकी है। ऐसे में बाघों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। बीते एक सालों में भोरमदेव के जंगल में दो बाघ की लगातार की उपस्थिति तथा चिल्फी-कान्हा बार्डर में एक अलग बाघ की उपस्थिति में विभाग लगातार दर्ज कर रही है।

टाईगर रिजर्वं-कॉरीडोर और ना ही बाफरजोन बन सका

कान्हा अचानकमार, टाईगर रिजर्वं के बीच स्थिति भोरमदेव अभ्यारण्य को जोड़ कर 75 किमी चौड़ा तथा 120 किमी लंबा वन्य प्राणी संरक्षण कॉरीडोर बनाने का प्रस्ताव वन विभाग ने राज्य सरकार को दो वर्ष पहले भेजा है। राज्य सरकार इस मामले में सिफ सैद्घांतिक सहमति दी हैं लेकिन कार्य योजना को कोई स्वीकृति अब तक नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर कवर्धा वन मंडल ने एनटीसीए को भोरमदेव अभ्यारण्य को टाईगर रिजर्वं बनाने का प्रस्ताव भेजा है लेकिन अब तक बीते 2 वर्षों में यहां से भी कोई स्वीकृति नहीं आई है और ना ही संरक्षण के दिशा में कोई निर्देश आया है। कुछ समय पूर्व एनटीसीए कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बाफरजोन के रूप में चिल्फी, रेंगाखार तथा भोरमदेव अभ्यारण्य को जोड़ने के संबंध में प्रारंभिक चर्चा की थी। जिसमें अब तक कोई भी निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में बांघों का संरक्षण सिर्फ कागजी कवायद साबित हो रहे है।

निर्देशों का इंतजार

वनमंडलाधिकारी विश्वेष कुमार ने बताया कि भोरमदेव अभ्यारण्य में दो बाघ बीते एक वर्षों से लगातार रहवास बनाए हुए है। चिल्फी बार्डर में तीसरे बाघ के प्रमाण भी मिले हैं इनके संरक्षण के लिए एनटीसीए राज्य सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिला है। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह मनाकर लोगों को वन्य प्राणी का महत्व बता रहे है। तथा उसके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है।

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