भोरमदेव व कवर्धा रेंज को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भेजाUpdated: Sun, 21 Sep 2014 09:58 PM (IST)

भोरमदेव व कवर्धा रेंज को टाइगर रिजर्व तथा चिल्फी व रेंगाखार वन परिक्षेत्र को बफर जोन बनाए जाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

कवर्धा (ब्यूरो)। भोरमदेव अभयारण्य में बाघ संरक्षण को लेकर नई कवायद शुरू हो गई है। भोरमदेव व कवर्धा रेंज को टाइगर रिजर्व तथा चिल्फी व रेंगाखार वन परिक्षेत्र को बफर जोन बनाए जाने के लिए कवर्धा वन मंडल ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसकी सहमति के साथ ही बाघों का संरक्षण शुरू हो जाएगा।

कान्हा-अचानकमार टाइगर रिजर्व के बीच स्थित भोरमदेव अभयारण्य में पिछले चार सालों से बाघों की मौजदूगी के प्रमाण के बाद उनके संरक्षण को लेकर वन विभाग, राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण लगातार कवायद की जा रही थी। कवर्धा वनमंडल के अनेक वन्य कारिडोर बनाए जाने के प्रस्ताव को अब तक सहमति नहीं मिली थी लेकिन पिछले तीन महीनों में भोरमदेव अभयारण्य के चिल्फी, रेंगाखार व भोरमदेव तथा कवर्धा वन परिक्षेत्र के जंगलों में वन विभाग को तीन बाघिन, तीन शावक तथा एक बाघ की मौजदूगी के प्रमाण लगातार मिल रहे हैं। जिसके संरक्षण को लेकर सीमित संसाधन में वन विभाग जुटा हुआ है।

बाघ प्राधिकरण के निर्देश पर काम शुरू :

भोरमदेव अभयारण्य में पिछले चार सालों में लगातार बाघों की मौजदूगी की सूचना व प्रमाण के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण में वन विभाग को नई गाइड लाइन जारी कर बाघों के संरक्षण के लिए भोरमदेव अभयारण्य के कुल क्षेत्रों को दो भागों में बांटकर बाघों के अनुकूल बनाने का निर्देश दिए हैं।

टाइगर रिजर्व व बफर जोन का भेजा प्रस्ताव :

कवर्धा वनमंडलाधिकारी विश्वेष कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश के बाद बाघों के संरक्षण को लेकर भोरमदेव अभयारण्य के चार वन परिक्षेत्रों को दो भागों में विभाजित किया गया है। भोरमदेव व कवर्धा वन परिक्षेत्र के 148 किमी के घने जंगल को टाइगर रिजर्व बनाने तथा चिल्फी व रेंगाखार वन परिक्षेत्र के 200 वर्ग किमी के घने जंगल को कान्हा व भोरमदेव-कवर्धा टाइगर रिजर्व के बफर जोन बनाए जाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है।

बाघों के लिए अनुकूल रहेगा नया टाइगर रिजर्व :

वनमंडलाधिकारी विश्वेष कुमार ने बताया कि भोरमदेव व कवर्धा का वन परिक्षेत्र का भगौलिक स्थिति बाघ के अनुकूल है। इन क्षेत्रों में उनके चारा व पानी के साथ-साथ हाई हिल्स व घने जंगल मौजदू हैं। इसलिए पिछले चार सालों से बाघों की अधिक संख्या में मौजदूगी भोरमदेव अभयारण्य में देखी जाती है और इसके पद चिन्ह तथा मवेशी के शिकार के बाद भोजन के लिए पहुंचने पर प्रत्यक्ष प्रमाण ट्रेप कैमरे में कैद हुई है। छोटा क्षेत्र होने के कारण बेहतर प्रबंधन में मदद मिलती है। सीमित स्टाफ से सुपरविजन व प्रोट्रक्शन में अच्छे काम होते हैं। महाराष्ट्र में भी एक छोटा टाइगर रिजर्व बनाया गया है।

7 बाघ, बाघिन व शावक की मौजदूगी :

भोरमदेव अभयारण्य के कवर्धा, चिल्फी, रेंगाखार व भोरमदेव के घने जंगलों में पिछले तीन महीने से तीन बाघिन, तीन शावक के साथ एक बाघ की मौजदूगी के प्रमाण वन विभाग को लगातार मिल रहे हैं। इस खबर को सबसे पहले नईदुनिया ने प्रकाशित किया था तथा वन विभाग के तत्कालीन वनमंडलाधिकारी अमिताभ बाजपेयी ने स्वीकार भी किया था।

'भोरमदेव अभयारण्य को दो भाग में बांटकर टाइगर रिजर्व व बफर जोन बनाए जाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण के गाइड लाइन के बाद राज्य सरकार को भेजा गया है।'

-विश्वेष कुमार -वन मंडल अधिकारी कबीरधाम

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