फर्राट अंग्रेजी बोलता ये आदिवासी सरपंच, गांव के लिए छोड़ी लाखों की नौकरीUpdated: Tue, 14 Nov 2017 12:16 PM (IST)

उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से ही गांव की तस्वीर बदलेगी। नयी पीढ़ी का शिक्षित होना जरूरी है।

रीतेश पांडेय, जगदलपुर। विकास से कोसों दूर दरभा ब्लाक के ग्राम पंचायत गुमड़पाल की पंचायत की कमान एक ऐसा आदिवासी युवक संभाल रहा है, जो केरल से मेकेनिकल में बीटेक की डिग्री लेकर लौटा है। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले पंडरू राम नामक इस युवक को उसके गांव में आमूल-चूल बदलाव की सनक सवार है।

पंडरू की कहानी किसी सिनेमाई कथानक से मिलती-जुलती है। दरभा ब्लाक मुख्यालय से 16 किलोमीटर की दूर पर स्थित महज एक हजार आबादी वाला गांव गुमड़पाल के गरीब माड़िया परिवार में पंडरू ने जन्म लिया। उसकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव में ही हुई।

कक्षा आठवीं के बाद उसने दरभा में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। हायर सेकेंडरी के बाद उसकी परिवार की माली हालत देखकर उसने काम करने सोची और इसी बीच उसका संपर्क किसी एनजीओ से हुआ। वह वर्ष 2004 में केरल चला गया। त्रिवेंद्रम में रहकर कुली-मजदूरी की।

साथ ही सेंट जेवियर्स कालेज में बीटेक मेकेनिकल में प्रवेश लिया। काम व पढ़ाई साथ-साथ चलता रहा। 2006 में उसकी पढ़ाई पूरी हुई। प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने के चलते कैम्पस सलेक्शन में ही किसी निजी कंपनी ने उसे अच्छी पगार पर नौकरी पर रख लिया। पंडरू ने नईदुनिया से चर्चा में बताया कि साल भर तक उसे अपने गांव व पिछड़ेपन की याद सताती रही और उसके गांव की मिट्टी से लगाव के चलते उसने अंतत: नौकरी छोड़ दी और वापस गांव पहुंच गया।

केरल से लौटकर उसने गांव को शिक्षित करने व विकास की धारा से जोड़ने का मन बना लिया। वर्ष 2010 में उसने जनपद सदस्य का चुनाव लड़ा। जनपद सदस्य रहते क्षेत्र के लिए संर्घषरत रहा। इसके बाद हाल में ही ग्राम पंचायत मामड़पाल से अलग हुए पंचायत गुमड़पाल के लोगों ने उसे निर्विरोध सरपंच चुना। ग्रामीण भी पंडरूराम के निर्णय से खुश है और ग्राम विकास में उसका साथ निभा रहे है।

शिक्षा की अलख जगाना मकसद

पंडरू गांव के बच्चों को खाली समय में न केवल अंग्रेजी व गणित पढ़ाते हैं। बल्कि गांव के निरक्षर लोगों को भी पढ़ाते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से ही गांव की तस्वीर बदलेगी। नयी पीढ़ी का शिक्षित होना जरूरी है।

वह शिक्षण सत्र में गांव के निरक्षर ग्रामीणों को उनके बच्चों को शाला प्रवेश के लिए प्रोत्साहित करते हैं। केरल में रहते हुए उन्होंने वहां की शिक्षा व्यवस्था, सामूदायिक खेती, सामूहिक मत्स्य पालन समेत व्यापार के मॉडल को देखा व प्रभावित हुए। वह धीरे-धीरे गांव की बुनियादी समस्याओं को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके गांव में पक्की सड़क नहीं है।

वहीं मुनगाबहार नाले में पुल व गांव से लेकर केशलूर तक दस किलोमीटर तक पक्की सड़क निर्माण का प्रस्ताव भी पंचायत ने पास किया है। पंडरू का कहना है कि उन्हें अपने गांव की सेवा करने में संतोष का अनुभव होता है।

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