जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते हैं दो राज्यों के 14 कुष्ठरोगीUpdated: Mon, 17 Jul 2017 12:53 AM (IST)

उन्होंने बताया कि दो कुष्ठ रोगियों की मौत देवड़ा में ही हुई। उन्हें भी दफन करने रिश्तेदार नहीं आए थे।

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्य के 14 कुष्ठ पीड़ित भगवान भरोसे देवड़ा जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते हैं और आपस में एक-दूसरे का सहयोग कर दुख दर्द बांट एक दूसरे की पीड़ा को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। दवा के अलावा शासन की ओर से इन्हें कोई मदद नहीं मिली है।

श्रद्घालुओं द्वारा दिए गए कपड़ा और एक शिक्षिका द्वारा राशन मिलने से इनकी उदरपूर्ति हो रही है। कुछ श्रद्घालुओं ने इनके लिए पांच-छह कमरों का एक आवास भी बनवा दिया है।

जिला मुख्यायल से करीब तीस किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा पर देवड़ा का चर्चित झाड़ेश्वर महादेव शिवालय है। इसी जंगल में छत्तीसगढ़ व ओडिशा राज्य के 14 कुष्ठ पीड़ित 20 साल से झोपड़ी बनाकर निवासरत हैं।

लोक मान्यता है कि देवड़ा तालाब में नहाने से चर्म रोग दूर होता है। इस आस्था के चलते ही स्वस्थ होने की अपेक्षा से कुष्ठ रोगी यहां निवासरत हैं लेकिन उनके गले हुए अंग पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं। यहां रहने वाली वृद्घाओं ने बताया कि छह माह में एक बार धनपुंजी अस्पताल का राजू नामक स्वास्थ्य कर्मी उन्हें दवाई दे जाता है। इसके अलावा उन्हें सरकारी मदद नहीं मिलती है।

खुद बनाए झोपड़ी

घाव भरे हाथों से जंगल की लकड़ियां एकत्र कर वे सिर छुपाने झोपड़ियां बनाए हैं। मंदिर आने वाले श्रद्घालु उन्हें कपड़ा भेंट कर जाते हैं वहीं कुछ भक्त राशन भी दे जाते हैं। कुष्ठ रोगियों ने बताया कि जगदलपुर की एक शिक्षिका विजयलक्ष्मी दानी उनके लिए हर रविवार को राशन लेकर आती हैं और सभी को बराबर बांट देती हैं। इससे ही गुजारा चल रहा है।

बस मिलने आते हैं रिश्तेदार

कुष्ठ पीड़ितों ने बताया कि देवड़ा मेला के समय उनके रिश्तेदार यहां आते हैं और कुशलक्षेम पूछकर चले जाते हैं पर कोई भी उन्हें वापस घर चलने की बात नहीं करता। यही हमारी सबसे बड़ी पीड़ा है। उन्होंने बताया कि दो कुष्ठ रोगियों की मौत देवड़ा में ही हुई। उन्हें भी दफन करने रिश्तेदार नहीं आए थे।

मंदिर के पुजारियों और चोकावाड़ा तथा देवड़ा के ग्रामीणों के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार किया गया। यह नियती उनके साथ भी हो सकती है। इसलिए सभी कुष्ठ रोगी एक-दूसरे का सुख-दुख बांटते हुए यहां निवासरत हैं। शहरवासी देते हैं दान

शिक्षिका श्रीमती दानी ने बताया कि वह लंबे समय से देवड़ा के कुष्ठ मरीजों की अपने स्तर पर सेवा कर रही हैं। समय मिलने पर शहर के कुछ दानदाताओं के घर से चावल, दाल, सब्जी एकत्र करती हैं और उसे कुष्ठ रोगियों में बांट देती हैं। उनका उदेश्य कोई प्रचार-प्रसार नहीं है अपितु मानव सेवा है। इस कार्य में सभी को आगे आना चाहिए।

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