ऐसा हुआ तो बूंद-बूंद को तरसेगा बस्तर, 28 किमी तक सूख जाएगी सबरी नदीUpdated: Mon, 13 Nov 2017 07:13 AM (IST)

बस्तर सीमा के नजदीक ओड़िशा की सबरी कोलाब नदी पर संकट छा गया है।

जगदलपुर। बस्तर सीमा के नजदीक ओड़िशा की सबरी कोलाब नदी पर संकट छा गया है। दरअसल इस नदी पर प्रस्तावित सिंचाई-विद्युत उत्पादन के मिडिल कोलाब मल्टीपरपज प्रोजेक्ट के बनने पर छग और ओड़िशा सीमा में करीब 28 किलोमीटर की लंबाई में नदी गैर मानसून सीजन में पूरी तरह से सूखी रहेगी।

ऐसा होने पर नगरनार स्टील प्लांट और केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी एनएमडीसी की स्लरी पाइप लाइन परियोजना के लिए मांग के अनुसार पानी देना भी संभव नहीं हो पाएगा। यही नहीं सबरी नदी में ग्राम तोलावाड़ा में पांच कंपनियों द्वारा प्रस्तावित हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर प्रोजेक्ट के लिए भी जलसंकट की स्थिति निर्मित होना तय है।

मिडिल कोलाब मल्टीपरपज प्रोजेक्ट से छग के संदर्भ में बनने वाली संभावित स्थिति का जिक्र करते हुए अधीक्षण यंत्री इंद्रावती परियोजना मंडल ने जलसंसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंता महानदी परियोजना को रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट को प्रमुख अभियंता छग शासन को भेजेंगे। जिसके आधार पर छग शासन ओड़िशा सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।

नईदुनिया ने सबरी नदी का पानी मोड़ने की ओड़िशा की तैयारी पर खबर सबसे पहले प्रकाशित की थी। जिसके बाद राज्य शासन ने जल संसाधन विभाग से रिपोर्ट तलब की थी। बस्तर से रिपोर्ट तैयार कर तीन दिन पहले भेज दी गई है। रिपोर्ट में विभाग की ओर से दिए गए अभिमत में छग और मध्यप्रदेश के बीच सबरी ही नहीं इंद्रावती नदी के जल बंटवारे को लेकर करीब चालीस साल पहले हुए समझौतों की समीक्षा करने की जरूरत भी बताई गई है।

नदी सूखनें के पीछे क्या हैं तर्क?

रिपोर्ट में बताया गया है कि सबरी कोलाब नदी ओड़िशा के कोरापुट जिले के सकनकरन पहाड़ के पूर्वी घाट से निकलकर बस्तर और छग के बीच 28 किलोमीटर की सीमा बनाते हुए दुबारा ओड़िशा में प्रवेश करती है।

सबरी नदी-जोरा नाला संगम के पांच किलोमीटर नीचे ओड़िशा द्वारा बैराज बनाकर सबरी नदी के एक अन्य नाला केराजोड़ी में बांध बनाकर बैराज का पानी बांध में एकत्र करने और इसके बाद ओड़िशा सीमा में सबरी नदी पर एक और बैराज बनाने से सीमा पर पानी की कमी रहेगी।

इसके पीछे मुख्य वजह नदी के एक ब़ड़े जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले जल को संग्रहित कर रोकने की तैयारी है। रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा गया है कि नदी सूख जाएगी।

क्या है मिडिल कोलाब प्रोजेक्ट?

सबरी नदी में ओड़िशा द्वारा बस्तर सीमा के नजदीक अपने इलाके में सबरी नदी में दो बैराज और सहायक नाला केराजोड़ी में बांध बनाकर 315 मेगावॉट बिजली उत्पादन करने और करीब 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता वाले मिडिल कोलाब मल्टीपरपज प्रोजेक्ट पर शुरू किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट से छग का सबसे अधिक नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। करीब 16 हजार करोड़ रूपए की इस परियोजना के लिए ओड़िशा ने छग शासन ने एनओसी मांगा है।

इनका कहना है

अधीक्षण यंत्री इंद्रावती परियोजना मंडल से ओड़िशा की मिडिल कोलाब मल्टीपरपज प्रोजेक्ट पर अभिमत मिल गया है। रिपोर्ट में नदी के कुछ क्षेत्र में सूखनें का खतरा बताया गया है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी - एसवी भागवत, चीफ इंजीनियर जल संसाधन विभाग

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