ताड़मेटला आगजनी कांड में गवाही देंगे कैदीUpdated: Mon, 11 Sep 2017 12:01 AM (IST)

इस घटना के लिए पीड़ितों का एक पक्ष पुलिस और सलवा जुडूम समर्थकों को तो दूसरा पक्ष नक्सलियों को जिम्मेदार बताता आ रहा है।

जगदलपुर। ताड़मेटला आगजनी कांड की न्यायिक जांच में यहां सेंट्रल जेल में बंद तीन विचाराधीन कैदी भी बयान दर्ज कराएंगे। घटन की जांच कर रहे विशेष न्यायिक जांच आयोग ने तीनों कैदियों को नोटिस जारी कर सात अक्टूबर को यहां जगदलपुर कमिश्नर कार्यालय भवन स्थित आयोग के दफ्तर में होने वाली सुनवाई में पेश करने जेल प्रशासन को भी पत्र लिखा है।

ताड़मेटला आगजनी कांड के तीन पीड़ित साक्षी कवासी भीमा पिता नंदा, मुचाकी नंदा पिता आयता और माडवी पिता कोसा को 22 जुलाई को सुकमा जेल से यहां सेंट्रल जेल में लाया गया था। तब से ये तीनों यहीं जेल में बंद है।

तीनों के जेल में होने की बात पिछले दिनों चिंतलनार थाना के प्रभारी ने विशेष न्यायिक जांच आयोग को नोटिस तामीली के संदर्भ में पत्र भेजकर दी थी। ये तीनों किस अपराध में जेल में बंद है इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन दूसरी ओर से सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसमें इनके नक्सल मामले में आरोपी होने की बात सामने आ रही है।

बताया गया कि तीनों बंदियों के साथ कुल 15 लोगों को गवाही के लिए नोटिस जारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि ताड़मेटला आगजनी कांड के तीन साक्षियों के जेल में होने में जानकारी सबसे पहले नईदुनिया ने ही 5 सितंबर को खबर प्रकाशित की थी।

कड़ी सुरक्षा में लाए जाएंगे गवाही के लिए

सात अक्टूबर को तीनों बंदियों को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में विशेष न्यायिक जांच आयोग के समक्ष गवाही के लिए लाया जाएगा। जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार आयोग की तरफ से अभी नोटिस नहीं मिली है। एक दो दिन में नोटिस मिल सकती है। बताया गया कि आयोग के समक्ष पेश करने पुलिस से सुरक्षा के लिए जवान मांगे जाएंगे।

पहले भी हो चुके हैं आत्मसमर्पित नक्सलियों के बयान

ताड़मेटला आगजनी कांड में कम से कम तीन ऐसे लोगों के न्यायिक आयोग में पहले भी बयान हो चुके हैं जो पहले नक्सली थे बाद में आत्मसमपर्ण करके एसपीओ बन गए हैं। ताड़मेटला और इसके आसपास का इलाका नक्सल प्रभावित है और इन गांवों के भी कुछ लोग नक्सलियों के साथ रहे हैं या फिर आज भी सक्रिय हैं।

क्या है ताड़मेटला आगजनी कांड

सुकमा जिले में 11 से 16 मार्च 2011 के बीच ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में ढ़ाई सौ वनवासियों के मकानो को आग लगा दी गई थी। इस घटना के लिए पीड़ितों का एक पक्ष पुलिस और सलवा जुडूम समर्थकों को तो दूसरा पक्ष नक्सलियों को जिम्मेदार बताता आ रहा है।

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