यहां पुलिस ही करने लगी थी प्रदर्शन, अब सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्टUpdated: Thu, 10 Aug 2017 12:19 PM (IST)

बस्तर कलेक्टर द्वारा रिपोर्ट देने में देरी के कारण मामले की जांच लंबे समय ये पेडिंग चल रही थी।

जगदलपुर। दस माह पहले बस्तर संभाग क सातों जिलों में पुलिस द्वारा नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का पुतला फूंकने की घटना से जुड़ी जांच रिपोर्ट जल्दी ही राज्य शासन को भेजी जाएगी। बस्तर कलेक्टर द्वारा रिपोर्ट देने में देरी के कारण मामले की जांच लंबे समय ये पेडिंग चल रही थी।

24 अक्टूबर 2016 को पुलिस के प्रदर्शनकारी बनने की घटना की जांच राज्य शासन ने कमिश्नर दिलीप वासनीकर को सौंपी है। संभाग के छह जिलों के कलेक्टरों ने अपनी जांच रिपोर्ट काफी पहले ही कमिश्नर को भेज दी थी, लेकिन बस्तर के तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया से रिपोर्ट नहीं मिल पाई थी।

अभी चार दिन पहले जिले के बस्तर कलेक्टर धनंजय देवांगन द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद राज्य शासन को जांच रिपोर्ट भेजने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमिश्नर जिला कलेक्टरों से मिली जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। अगले आठ दस दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेज दी जाएगी।

क्यों उग्र हो गई थी पुलिस

सुकमा जिले में मार्च 2011 में हुए ताड़मेटला आगजनी कांड की जांच रिपोर्ट सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद पुलिस का एक वर्ग उग्र हो गया था। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का कहना था कि रिपोर्ट में ताड़मेटला आगजनी कांड में पुलिस की भूमिका पर प्रतिकूल टिप्पणी की गई है।

रिपोर्ट के सामने आने के बाद आलोचनाओं से घिरी पुलिस ने सीपीआई से जुड़े कुछ नेताओं, के साथ हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, सोनी सोरी, वकील शालिनी गेरा, पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम आदि का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया था।

पुलिस के अचानक उग्र होने और प्रदर्शन करने की घटना से स्तब्ध राज्य शासन ने घटना की जांच के आदेश कमिश्नर बस्तर को दिए थे। प्रदर्शन करने की घटना संभाग के सभी जिलों में हुई थी इसलिए कमिश्नर ने सभी जिलों के कलेक्टरों से जांच रिपोर्ट मंगाई थी।

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