यहां मरना आसान है लेकिन अंतिम संस्कार करना सबसे मुश्किलUpdated: Tue, 10 Oct 2017 01:00 PM (IST)

इस सूचना पर जब वे मुख्य डिपो में पहुंचे तो वहां के प्रभारी रेंजर सलाम ने निस्तार डिपो से पर्ची कटवाकर लाने की बात कही।

कोण्डागांव, जगदलपुर । जिला मुख्यालय में एशिया का सबसे बड़ा लकड़ी डिपो होने के बावजूद आमजन दाह संस्कार के लिए जरूरी लकड़ी के लिए भटक रहे हैं। रविवार को ऐसा ही वाक्या नजर आया। जिला मुख्यालय से लगभग 14 किमी दूर स्थित ग्राम नगरी के पटेलपारा के एक महिला की आकस्मिक मौत हो गई।

ग्रामीण दाह संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी लेने के लिए मुख्यालय स्थित निस्तार डिपो पहुंचे जहां उन्हें बताया गया कि लकड़ी खत्म हो गई है लेकिन मुख्य डिपो में रखी जलाऊ लकड़ी में से उन्हें उपलब्ध हो सकती है।

इस सूचना पर जब वे मुख्य डिपो में पहुंचे तो वहां के प्रभारी रेंजर सलाम ने निस्तार डिपो से पर्ची कटवाकर लाने की बात कही। निस्तार डिपो के प्रभारी के छुट्टी पर होने के कारण पर्ची मिलना संभव नहीं था।

दाह संस्कार हेतु आवश्यक लकडी के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर ग्रामीणों में डिपो प्रभारी सलाम के व्यवहार को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिला। उनका कहना था कि वे किसी तीज त्यौहार, पार्टी व उत्सव आदि के लिए नहीं बल्कि दाह संस्कार हेतु आवश्यक लकड़ी लेने आए थे, वह भी राशि अदा करते हुए।

ऐसे में डिपो प्रभारी का लकड़ी न देना इंसानियत के विरूद्ध है। आक्रोशित ग्रामीणों ने डिपो प्रभारी को हटाए जाने वनमंडलाधिकारी से लिखित शिकायत की है। उच्चाधिकारियों के दखल से अंतत: ग्रामीणों को दाह संस्कार के लिए आवश्यक लकडी उपलब्ध करा दी गई, लेकिन रेंजर के रवैये से उनमें काफी नाराजगी है।

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