52 शक्तिपीठों में से एक ऐसा मंदिर जहां मना है घंटा बजानाUpdated: Tue, 18 Apr 2017 08:15 AM (IST)

पुजारी की शिकायत की है कि घंटों की आवाज से उनका ध्यान भंग होता है, इसलिए 5 साल पहल घंटों के पेन्डूलम को निकाल दिया।

जगदलपुर। मां दंतेश्वरी मंदिर में लटके घंटों को बजाना वर्जित है। लोग इन्हे बजा न पाए इसलिए घंटों के मध्य के पेन्डूलम को निकाल दिया गया। यह कार्रवाई किसी और ने नहीं अपितु टेम्पल इस्टेट कमेटी ने ही की है। इस बात को लेकर लोगों में रोष भी है। इनका तर्क है कि घंटा-घड़याल मंदिरों को दान किए जाते हैं। यह वस्तुएं मंदिर में नहीं बजेंगे तो और कहां बजेंगे?

बताया गया कि मंदिर के एक पुजारी की शिकायत की है कि घंटों की आवाज से उनका ध्यान भंग होता है, इसलिए पांच साल पहले ही घंटों के पेन्डूलम को निकाल दिया गया है। इसके बाद से ही यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में घंटा बजाकर प्रवेश नहीं कर पाते। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने यह पहला मामला देखा है जब मंदिर किसी मंदिर में घंटा बजाने को लेकर रोक लगा दी गई हो। कई लोग मन्नत पूरी होने पर यहां घंटे दान करते हैं, ऐसे में मंदिर में इन्हें बजाए जाने से रोक पर वे नाराज भी होते हैं।

52 शक्तिपीठों में से एक है दंतेश्वरी मंदिर

मां दंतेश्वरी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यताओं के अनुसार यह वहीं स्थान है जहां देवी सती का दांत गिरा था। कहा जाता है कि मंदिर त्रेता युग से यहां स्थित है। जब सत्य युग में सभी शक्ति पीठों का निर्माण हुआ था, अत: इस स्थान की देवी को दंतेश्वरी कहा गया।

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