बस्तर के 25 फीसदी किसानों को भी नहीं मिलेगा धान का बोनसUpdated: Wed, 13 Sep 2017 12:47 AM (IST)

पंजीयन कराने के बाद भी करीब 17.53 फीसदी किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं।

जगदलपुर(दीपक पांडेय)। कृषि में लगातार घाटे की समस्या का सामना करने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 300 रुपए धान का बोनस देने की घोषणा कर भले ही छत्तीसगढ़ सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है पर सरकारी आंकड़ों पर ही यदि गौर करें तो वर्ष 2016-17 में बस्तर संभाग के 25 फीसदी किसानों ने भी अपना धान समर्थन मूल्य पर शासकीय खरीदी केन्द्रों में नहीं बेचा है। वहीं पंजीयन कराने के बाद भी करीब 17.53 फीसदी किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं।

बस्तर संभाग में करीब साढ़े चार लाख धान उत्पादक किसान हैं और धान उत्पादन का रकबा वर्ष 2016 में 655230 हेक्टेयर रहा। इसमें से 215660.78 हेक्टेयर रकबे के 113990 किसानों ने वर्ष 2016-17 में धान बेचने के लिए पंजीयन कराया जिसमें से 173119.76 हेक्टेयर रकबे के 94003 किसानों ने शासकीय समर्थन मूल्य पर शासकीय धान खरीदी केन्द्रों में 43 लाख 36 हजार 392 क्विंटल धान बेचा है जिसके एवज में उन्हें करीब 130 करोड़ रुपए का बोनस मिलने जा रहा है।

'बस्तर संभाग में धान उत्पादक किसानों की संख्या करीब साढ़े चार लाख है। वर्ष 2016 में खरीफ में 655230 हेक्टेयर में धान का क्षेत्राच्छादन तथा इस वर्ष 629470 हेक्टेयर में क्षेत्राच्छादन हुआ है। खरीदी केन्द्रों से गांव की दूरी, भूमि के कई हिस्सेदार समेत नामांतरण, बंटवारा न होने, पंजीयन की जटिलता से समर्थन मूल्य पर शासकीय खरीदी केन्द्रों में किसान धान नहीं बेच पाते इस ओर जागरूकता के प्रसार की जरुरत है और पहले की अपेक्षा जागरूकता बढ़ रही है।' - अजय कुमार सलामे, सहायक संयुक्त संचालक कृषि, बस्तर

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